#Kavita by Ved Pal Singh

वक्त बदलता रहता है …………

हर आदमी बुरा नहीं होता जमाने में कभी,

दौरे वक्त है कि इंसान इंसान से डरता है।

इंसान हमेशा गलतियों का पुतला रहा है,

गुनाह है जब वो खुदी में गलती करता है।

 

वक्त एकसा नहीं रहता बदलता रहता है,

कभी अच्छाई तो कभी बुराई का होता है।

अच्छे वक्त में अपनों से सुकून मिलता हैं,

बुरे वक्त अपना ही डगर में कांटे बोता है।

 

टूटते हैं रिश्ते गलत फहमी में अक्सर ही,

च्यूंकि रिश्तों में सच की दरकार होती है।

ईमानदारी की होती है नजर ऊँची ता उम्र,

बेईमानी जरूर एक दिन शर्मसार होती है।

 

बुझ जाते हैं दीपक तेल की कमी से भी,

हर बार दोष हवाओं का ही नहीं होता है।

और भी तो हैं कारण कश्ती डूब जाने के,

हर बार दोष तूफानों का ही नहीं होता है।

 

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