#Kavita by Ved Pal Singh

आज तक – 2

गुनाह पे मेरे बढ़ते कदम नहीं रोक पाया मै आज तक।

रूबरू होकर भी जिंदगी नही समझ पाया मै आज तक।

 

ये लोग कहते हैं कि गुनाह आदमी के खून में होता है,

या सर चढ़ जाए तो किसी लालच के जूनून में होता है,

कोई लालच और खून ऊपर से नही लाया है आज तक।

 

मुझे जो सिखाया गया वही सीखा मैंने इसी जहान में,

मैंने तो वही सुना जब जो फूँका दुनिया ने मेरे कान में,

उससे इतर कभी नहीं कुछ भी कर पाया मै आज तक।

 

अब क़यामत पर करूंगा खुदा से मिन्नत मै पुरजोर,

अगले जन्म दे दुनिया जिसका आलम हो कुछ और,

मौत पे समझा पछतावे से उबर न पाया मै आज तक।

 

या तो जन्म फिर मत देना या देना नेकी की दुनिया,

चाहे मुझको सहरा दे देना मत देना फूलों की बगिया,

यूँ मज़े में हूँ तेरे पास रहकर बिन काया मै आज तक।

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