#Kavita by Ved Pal Singh

फूल बच्चों जैसे होते हैं ………………

देख खिलते फूलों को मन में तुम मुस्काते हो,

खुशबू से तुम उनकी अन्तर्मन में खो जाते हो।

यूँ फूलों की बगिया में ध्यान मग्न हो जाते हो,

और मीठे रंग बिरंगे सपनों में ही खो जाते हो।

 

भँवरे के गुंजन शोर से जब तुम जग जाते हो,

रंग बिरंगी तितली के पीछे भी दौड़ लगाते हो।

अनायास ही फिर तुम इतने ललचा जाते हो,

कि झट से कोई सुन्दर फूल तोड़ ले आते हो।

 

क्या सोचा कभी है तुमने ये फूल कैसे होते हैं,

फूल हमारे छोटे से सुन्दर बच्चों जैसे होते हैं।

उतने ही सुन्दर होते हैं उतने ही प्यारे होते हैं,

हर नेमत से ऊपर होते हैं बहुत दुलारे होते हैं।

 

बहुत ही नाजुक होते हैं आँखों के तारे होते हैं,

बच्चों जैसे हँसते हैं पर उनके जैसे नहीं रोते हैं।

धीरे से मुस्कुराकर सबका दिल जीत लेते हैं,

बे रंग हुए आलम को ये रंगीन नजारा देते हैं।

 

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