#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

बंधे हुए हैं हम सफ़र एक बंधन में हम दोनों

 

बंधे हुए हैं हम सफ़र एक बंधन में हम दोनों

 

तन मन में हम दोनों हर धड़कन में हम दोनों |

 

जमाना है ज़ालिम यहाँ सताना जानता है वो

 

संग संग चलते रहेंगे इस जीवन में हम दोनों |

 

बहुत ही मुश्किलों से ये सजायी है जो आशियां

 

मिटेंगे तो बंधेंगे हम एकही कफन  में हम दोनों |

 

गुलाबों की दुनिया में यारो काँटे  हुआ करते हैं

 

शीशे में वैसे दीखेंगे हम एक दर्पन में हम दोनों |

 

प्यार की जिंदगी में कभी रेत तो  मिलती ही है

 

हँसते हँसते तपेगें हम जिस तपन में हम दोनों |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

Leave a Reply

Your email address will not be published.