#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

नव वर्ष का नव गीत

 

आओ

नव वर्ष का

नव रीत निभायें

नव गीत गायें

नव प्रीत निभायें

 

कुसुम की कलियाँ

कर लायें

 

घर सजायें

 

पहर लग

लगनशीलता से

सजायें गलियाँ

 

सभी के साथ

नव संगीत गायें

 

सरिता की

निर्मल जल धारा

 

मन विचित्र पवित्र सारा

 

नव जागरण/नव उत्थान

हृदय हर्षित, नव गीत गायें

 

अतीत से

कुछ तो कुछ जरूर पाया

है

 

निरर्थक इतना समय/दिन

थोड़े साथ निभाया

है

 

एक दूजे को

सहर्ष अपनाया

 

जो हो रहा है

हमसे /हमरा बन कर

विदा

 

सब दिन किया – हित

 

उसका भी – हित

सुनायें

 

आओ

नव वर्ष का नव गीत गायें |  –  विद्या शंकर विद्यार्थी

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