#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

लोग

 

लोग

 

कृष्ण सुदामा की मित्रता का

गुणगान करते नहीं थकते

 

जब कि अपने मित्र से

छल करते

नहीं चुकते/साधते मतलब

 

लोग

 

श्रवण का चरित्र चित्रण करते

नहीं अघाते

 

जब कि अपने माँ बाप

के जीवन में काम नहीं

आते

 

दो रोटियाँ तो अलग की        बात है

 

अलग की बात है

तीर्थाटन

 

लोग

 

गंगा की पवित्रता

गाते नहीं चुकते

 

जब कि

 

प्रदूषण भी

फैलाते नहीं करते तनिक भी विचार

 

सोचता हूँ

 

लोगों की उँगली उठाने की

कब बदलेगी प्रवृत्ति

कब जगेगा सद् विवेक

 

हम दिखेंगे अनेक में – एक

 

और

 

हम गर्व से कह सकेंगे

 

यह पवित्र गंगा का देश है |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

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