#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

वंसत तुम आ गये

 

वंसत

तुम्हारे आने की आशा थी

 

समय से आते हो

नीयत समय से आओगे

 

कोयल की कूक, फूलों में

सुंदर महक

तुम्हारे आने पर ही तो आते हैं

 

बयार उतावली होती है

 

तुम्हारे आने पर

 

भौरें नव कलियों पर मंडराते हैं

 

तुम्हारे आने पर

 

मधुमक्खियाँ अपने छाते में

शहद संचय करतीं हैं

 

तुम्हारे आने पर

 

वसंत तुम सोचते हो

 

तुम्हारा आना कितना

रखता है महत्व /और अपनत्व

 

महत्व और अपनत्व के बीच में

 

किसी के कंता का आना भी

 

होता है

वैसा आना  वह नहीं आये तो

जिंदगी सारी खुशियां चली जाती है

हर पल उसे वेदना सताती है

 

वसंत

 

तुम्हारे आने का मतलब

 

आम में मंजरियाँ की अभिलाषा थी

अब

गाँव में होली के ताल उठेंगे

ढोल बजेंगे

झाल और करताल साथ मिलेंगे

 

वसंत

तुम आ गये |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

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