#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

आज के लिए

 

जिसकी

बात उठी है अभी

नैतिकता

पायी है आपने  – उनमें  कभी

 

मुझे तो

नहीं मिली है

राई भर भी

 

वे

रखते हैं

अन्य की

खबर भी

 

जितनी रखते हैं अपनी

चिंता

 

और …….. और

ढूँढ कर देते हैं

पुट

 

नैतिकता

जड़ में है न धड़ में

 

नैया

चल रही है

धार में

आप अौर हम

धार में बह रहे हैं

धार में रह रहे हैं

झूठी

दीपावली मना रहे हैं

त्यौहार में रह रहे हैं

 

कलम

हमारी चल रही है

कल के लिए

अौर….  अौर…. और

आज के लिए

रफ्तार के लिए |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

C/O डॉ0 नंदकिशाेर तिवारी

निराला साहित्य मंदिर

बिजली शहीद सासाराम, रोहतास, बिहार मो0सं0 7488674912

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