#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

होली

 

रसिया ना माने रे रंग लिये आये ब्रज खोरी

 

एक ओरे स्याम सुन्दर की टोली

 

दूजे ओर ब्रज की गोरी

 

लुक छिप स्याम मारे पिचकारी

 

भींग गई ब्रज की गोरी

 

रसिया ना माने रे रंग लिये करत बल जोरी |

 

उद्धव स्याम सखा भी आये लाये ज्ञान के झोली

 

का होइहें ई ज्ञान गेंठरिया

 

जहाँ चले रंग रोली

 

ऊधो के सुधौ नाहीं रहले धई रंगे ब्रज गोरी |

 

लाल गुलाल उड़े गलियन में

 

हा हा हा हा धई गोरी

 

गोरी के गोर नरम कलइया

 

टूटि जइहें री ममोरी

 

होली रस्म कीजै होली में होली रहे बस होरी |

रसिया ना माने रे रंग लिये आये ब्रज खोरी |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

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