#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

कमजोरी की अभिव्यक्ति

 

मैंने पूछा

 

एक आदमी से

 

भाई साहब, इस संसार में

 

एक और अपित्र चीज क्या है  ?

 

उन्होंने कुछ कहा नहीं

 

मैंने उनसे फिर पूछा

 

चूप क्यों हैं आप….

 

पूछ रहा हूँ मैं

 

आप ही से

 

नहीं पता है आपको

 

रखते नहीं खबर

 

किसी बात की

 

दृष्टि नहीं दौड़ती

 

आपकी…. किसी ओर  ?

 

तो माथा मत लगाइए आप

 

सुनिये

 

वह है इस जमाने में

 

किरानी की फाइल

 

फाइल दावा ठोकती है

 

वह भी मुझसे

 

मैं पवित्र हूँ

 

उसके दावे को मैं कर देता हूँ

 

दरकिनार

 

भले ही वह नहीं माने अपनी हार

 

कुछ लोग भी करते हैं

 

और

 

वह भी करे तो करे मुझसे तकरार

 

अब

 

आप ही कहिए

 

कैसे करूँ

 

अनाचार स्वीकार

 

मिटती रहे पवित्रता

 

टूटती रहे मर्यादा की

 

दीवार

 

ठीक है ?

 

बेझिझक

 

कह डालता हूँ  – सारी सच्चाई

 

ओ फाइल!

 

एक खैनिया बाबू आये थे

 

बिना खैनी मुँह में लिये

 

पूरी उँगली ओठ में दिये

 

खोलते नहीं थे  – तुम्हें / तुम्हारे

 

पन्ने

 

गुटका बाबू

 

उन्ही की राह की राही निकले

 

और तो और

 

पान के शौखिनिया बाबू की भी

 

वही आदत

 

पान दबाये

 

चूना हाथ की तर्जनी उँगली में

 

लगाये

 

चाट लिये सफेदी

 

जैसे

 

अच्छी किस्म की काढ़ रखी हो

 

मलाई

 

उनकी थूक, थूक नहीं जैसे

 

अमिय रस हो

 

आदमी का व्यवहार महकता है

 

किसने नहीं लगाये  – थूक तुझमें

 

देती हो

 

साफ सफाई / पक्का सबूत

 

आदमी की कमजोरी

 

क्यों छिपाती हो तुम

 

तुम्हीं बताओ

 

इने गिने को छोड़

 

बैंक के बाबू नोट में

 

नहीं लगाते  – थूक

 

थूक नहीं लगाते

 

बस के कण्डक्टर टिकट में

 

अन्तस् से टूटती

 

विह्वलता में फूटती

 

खायी वह चोट थी

 

हर दिन की कचोट थी

 

खैनी के पीक, गुटके के मैलापन

 

और पान के थूक

 

सभी मिल

 

कर दिये उसे मजबूर

 

रह गयी वह निरूतर

 

तब

 

फैसला छोड़ता हूँ मैं

 

आप पर

 

कमजोरी की अभिव्यक्ति

 

मेरी कमजोरी होगी

 

या होगी खासियत

 

शीघ्र बतायें आप |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

 

 

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