#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

किताब

 

किताब में

 

बातें जिंदगी से आती है

 

जिंदगी जब जब लड़खड़ाती है

 

किताब

 

राह दिखाती है

 

देती है साक्ष्य

 

कितनी जिंदगियाँ गुजरी है

 

दुरूह राह से

 

लड़ी है / अड़ी है – उत्साह से

 

रेत थका नहीं सकी

 

आग जला नहीं सकी

 

आँधी रोक नहीं सकी

 

किताब सहेज रखती है दुर्लभ

 

उदाहरण

 

उनसे लेते हैं हम सबक

 

आदमी

 

आदमी को करता है हतोत्साहित

 

किताब वह काम नहीं करती

 

जो आदमी के साथ आदमी

 

करता है अमानवीय व्यवहार

 

किताब

 

अच्छी रिश्ते भी ढूँढ़ लाती है

 

किताब

 

रिश्ते और जिंदगी के बीच

 

सेतू का कार्य करती है

 

किताब अस्त्र नहीं शस्त्र है |

विद्या शंकर विद्यार्थी

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.