#kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

कविता

लगता है उदीप्त रवि खो गया है

पूरे भारत को क्या हो गया है
लगता है उदीप्त रवि खो गया है

चिंताएँ बढ़ रही हैं सभी की यूँ
शोकाकुल लोग बोलता नहीं क्यूँ
साँसे बंद है वक्त गम बो गया है
लगता है उदीप्त रवि खो गया है |

कल चादर ओढ़ शाम आयी थी
बिना बताये वह नाम आयी थी
पंथी निर्भीक था वो सो गया है
लगता है उदीप्त रवि खो गया है |

मशाल जलेगा अब सदा के लिए
क्या क्या किया वह वादा के लिए
अपना नहीं था अपना हो गया है
लगता है उदीप्त रवि खो गया है |

विद्या शंकर विद्यार्थी

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