#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

कविता

कल बाजार में लोग नहीं थे

कल
बाजार में लोग नहीं थे
लोग होते कैसे
अटल नहीं थे

बाजार का अटल नहीं
दरकार का अटल
सुख दुःख के संसार का अटल
अटल की वाणी कभी किसी को आहत नहीं की
राहत के सिवा

लोगों का अटल दिल्ली में
पंचतत्व में मिल रहा था
और लोग के टी0 वी0 के पास बैठे

जाते पथिक से मिल रहा था |

विद्या शंकर विद्यार्थी

Leave a Reply

Your email address will not be published.