#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

दीप एक नहीं दो जले

दीप एक नहीं दो जले
एक से अँधियारा मिटे
एक से अज्ञानता टले
लोग कहते हैं दीप तले तम होता है
तम कहाँ वह लोगों का वहम होता है
वह तो छाया होती है
प्रकाश की प्रकृति होती है
चित्ति और चित्ती में भेद समझें
दीप को समझ जायेंगे
दीप एक नहीं दो जले।

विद्या शंकर विद्यार्थी

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