#Kavita By Vidhya Shankar Vidhyarthi

तुम रंगोली हो

रंगोली
कल होली जल गई
तुम जलती नहीं रंगती हो
अपने रंग में

लोग आतुर रहते हैं
कब किसे रंग दें
बिछुडे़ नहीं किसी से कभी संग दें
बिछड़ गया है कोई का कोई
उसे अपने संग लें

तुम ईर्ष्या के प्रतीक नहीं
सद्भाव सूचक हो
हर्ष हो जीवन का उत्कर्ष हो
परामर्श हो
और हो विमर्श हो
तुम रंगोली हो।

विद्या शंकर विद्यार्थी

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