#Kavita by Vidhya Shankar Vidhyarthi

माँ

 

पलक की नींद

जैसी लोरियाँ

सुनाती

माँ बुलाती है

वैसी

दवा नहीं बुलाती

 

 

जिंदगी में जैसी

शीतलता

माँ लाती है

वैसी

हवा नहीं लाती

 

माँ में

ममत्व है

दवा में

रसायनत्व है

हवा में

घनत्व है

और … और

दवा और हवा में

जो कुछ नहीं है

 

 

वह

निधि माँ में है

 

माँ में

अपनत्व है

 

माँ

सृष्टि की

श्री है

 

माँ से

सृष्टि की श्री वृद्धि होती है

 

माँ

बस माँ है |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

 

दीये जलाने में

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