#Kavita by Vijay Narayan Agrwal

–:गुरु वन्दना:–

 

गुरुदेव मेरी रचना, हिरदय से लगा लेना।

क्षमता से मथा चिन्तन,संतृप्त करा देना।।

 

हर राह  में  रोड़े  हैं, हर चाह देत उलझन,

मन सोंच नहीपाता,किसओर चले जीवन,

 

उल्लास  की गठरी तो ,वैसे  भी पुरानी है,

चिन्ता से घटी सुषमा,माया की मथानी है,

 

व्याकुल है हृदय ऑगन,पुरुषार्थ प्रभा देना–

मनुहार  भरी  आशा  ,सद्ज्ञान  सुधा देना—

 

गुरु देव मेरी रचना,हिरदय से लगा लेना।

क्षमता से मथा चिन्तन,संतृप्त करा देना।।

रचयिता:–

विजय नारायण अग्रवाल “भ्रमर ”

 

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