#Kavita by Vijay Narayan Agrwal

–:प्रार्थना – भजन:–

 

बाला जि मेरी नइया, उस पार लगा देना।

आया हूँ शरण तेरी, चरनों में जगह देना।।

 

मन   बोल  रहा  मेरा, सन्सार  बड़ा  झूठा,

झोली तु भरे निशदिन,फिर भी है वो रूठा,

क्या चाह तेरी ऐसी , कुछ  राह दिखाती है,

अपनों से ज़ुदा करके, विश्वास  बढा़ती  है,

शंकालु मेरी बृत्ती,उसको न हवा देना——

 

चहुँ ओर चढी़ आँधी,व्यवहार  में  है झटका,

मन सोंच नही पाता,आखिर मैं कहॉ भटका,

कुछ बात तुम्हारी तो ,संसय को  बढ़ाती  है,

संताप  प्रखर   बाती, निष्ठा  को  घटाती  है,

दुर्योग हटा करके, सहयोग बढ़ा देना——

 

हर ओर ब्यथा बारिस, झझकोर रही हमको,

कोइ मान नहीं रखता ,सन्तान कहें किसको,

दानव की प्रबृित्ती क्यूँ,मानव में झलकती है,

जैसे की महक चन्दन, घिसने से लपटती है,

बन्धन से बढ़ी पीड़ा,अब जल्दि घटा देना—-

 

रस  गन्ध  चढ़ा  वैभव,उल्लास से युँ लड़ता,

आकुल है ‘भ्रमर’ जीवन,पर बोध नहीं हरता,

ममता  में  तेरी  सूरत, मुझे  जान से प्यारी है,

अब  लाज नहीं  मेरी, अब  लाज  तुम्हारी है,

प्रतिभा की धनी मूरत,चित से न हटा देना–

इस बात का दे उत्तर ,सन्तोष जगा देना—–

 

बाला जि मेरी नइया, उस पार लगा देना।

आया हूँ शरण तेरी, चरनों में जगह देना।।

 

गुरुदेव मेरी,  रघुबीर मेरी, घनश्याम मेरी

महदेव मेरी, हे मात मेरी, हनुमान मेरी आदि

नाम जोड़ कर सार्थक प्रार्थना कर सकते हैं।

 

विजय नारायण अग्रवाल ‘भ्रमर’ रायबरेली

 

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