#Kavita by Vijay Narayan Agrwal

–:गठरी:–

 

बोध की है गठरी, क्रोध करो कम।

नाम जपो हरि का,बोल बम-बम।।

 

करम सुलेख मिटत नहि भाई,

परम  ब्रह्म  की लखि चतुराई,

राम   जनम  ले  बने   यदुराई,

भोले का डमरू बोले डमडम—-नाम जपो

 

इन्द्र  ने  ऐसी   अग्नि  जगाई,

असुर   विलोकत  दूध मलाई,

काम-क्रोध की पकड़ कलाई,

बदले में रावन बोले हम हम —–नाम जपो

 

ग्रह  का भेद  उलटि समझावै,

ज्ञान  ध्यान  दे  मन अकुलावै,

दशा  दशान्तर  गति  बतलावै,

द्वापर से शनि के बढ़े हैं कदम—नाम जपो

 

अस कलयुग परताप बढ़ाये,

काम क्रोध मद लोभ जगाये,

कोई न अपना सभी पराये,

लगन ज्योति में छिपा है मरम—नाम जपो

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.