#Kavita by Vijya Narayan Agrwal

-:श्री कृष्ण वन्दना:–

मरम न तुम्हरा ग्वाले जाने,
काले किशन कन्हाई हो।
हाथ पकड़ कर घूम मचावै,
खावैं दूध मलाई हो।।
1*********
करम कोअपने देवकी ठोकत,
ये कैसा अन्याय है,
विधि का लिखा टले न टाले,
सूझत नही उपाय है,
सुख भी सगरा छीने लेता,
आज हमारा भाई हो—
मरम न तुम्हरा जाने———–
2
धाक जमाकर बृन्दावन में,
मामा कंस को मारा है,
कलतक थे जो जान के दुशमन,
उनको दिया सहारा है,
रक्षा करो श्री नाथ हमारी,
सुमिरत मीरा बाई हो—
मरम न तुम्हरा जाने———–
3
शम्भुजी तुमको गोकुल आकर,
झाड़ा ऐक लगाते हैं,
रसमय सुन्दर सुनत बॉसुरी,
ऊधौ पेंग बढ़ाते है,
मार तार बैभव को तुम तो,
करते नाग नथाई हो—
मरम न तुम्हरा जाने———–
4
सुमिरन तेरा करने वाले,
तेरा ही गुण गाते हैं,
धारण करके ज्ञान ध्यान को,
वो तेरे हो जाते हैं,
कठिन मार्ग पर चलने वाले,
देते नही सफाई हो—
मरम न तुम्हरा जाने———–
5
रथ के बने सारथी तुम तो,
चिंता की क्या बात है
युग धर्म अर्जुन ने सीखा,
भृगु ने मारी लात है,
‘भ्रमर’हृदय को दे दो सहारा,
चीर ने पीर बढाई हो—

मरम न तुम्हरा ग्वाले जाने,
काले किशन कन्हाई हो।
‘भ्रमर’ रायबरेली16/09/18
मो०±919453510399

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