#Kavita by Vikram Gathania

विवेक खोये दिनों में

हमें हमारे हालात
वरदान लग सकते हैं
जब हमें अनावश्यक
झूठ मूठ से उपजी
सहानुभूति नहीं  मिलती है
जब हम जूझते हुए लगते हैं
मिल भेंट आते हैं  नये लोगों से
जिन्हें हम आये गये प्राणी ही लगते हैं ।

दरअसल दिन अच्छे ही होते हैं
किन्हीं दिनों को बुरा कहने के लिए
हम सचमुच में खो देते हैं जब अजीजों  को
वही हो सकती है एक वजह
किन्हीं दिनों में
भले ही उपजते  हों रिश्ते
चलते फिरते इस संसार में
जिन्हें हम अगर खोते भी हैं
इस चलते फिरते संसार की गति
हम नहीं रोक सकते ।

हम अचानक बेवजह
किन्हीं दिनों में दुख में घिरते  हैं जब
विवेक खोते हैं
तब हमें निश्चित ही इंतजार करना चाहिए
उनके बीत जाने का
अपने संभव प्रयास जारी रखते हुए
हमारे  प्रयास चमत्कार सिद्ध हो जाते हैं एक दिन
वशर्ते हम दूसरों के बहकावे में न आते हों
उन विवेक खोये दिनों में ।

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