#Kavita by Vikram Gathania

घर से दूर

घर से दूर गये आदमी को
याद आता है घर !

उसे याद आती है वह चिड़िया
मुंडेर पर जो बैठा करती है
छत पर
पानी के कटोरे के पास
जो मंडराती है
और बिखरे दानों के पास
जो होती है !

घर से दूर गया आदमी घर की याद में
चिड़िया हो जाना चाहता है
प्रेम स्वार्थ के बिल्कुल आर या पार की
चीज़ नहीं होती
कि वह दानों के लिए
या कि पानी के लिए हुआ करती है !

और चिड़िया की याद भी नहीं है प्रेम
प्रेम एक चिर अतृप्त प्यास है
जो जगाया करती है तड़प
साक्षात मिलन के लिए
मिलन अबधि में
बेशक रहा ही करता है भाव
तृप्ति का सा।

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