#Kavita by vinay bharat sharma

वो कोई और हैं

वो कोई और हैं
जो
लिखता हैं
कविता कहानी और व्यंग्य
मैं हूँ साधारण

वो हैं विशिष्ट
कभी कभी
हावी होता हैं
वह
जबरन मुझ पर
और घिसता है
स्याही
लीपता हैं
कोरे कागज
फिर
निर्मित होता हैं
नया साहित्य
जी हाँ
वह मैं नही
जिसे देखते हैं
आप अखवारों में
पत्रिकाओं में
या
किसी मंच पर
बोलते हुए
वह मेरे अन्दर
का
इन्सा है
कोई दूसरा इंसा
उसके जागते ही सो जाता हूँ
मैं
एक गहरी नींद
में
उठने पर
लिखा मिलता हैं
कुछ उसका सन्देश
जो चाहता हैं
मुझे कुछ कहना
फिर
कैसे कहूँ
कि
वह मैं हूँ
क्योंकि
मुझे पता हैं
वो कोई और हैं

विनय भारत

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