#Kavita by Vinay Shukla

     (1)
स्वागत है पुण्य पथ पे सदकाम कीजिएगा
मन को पवित्र मंदिर ,सा धाम
कीजिएगा
भारत ये विश्व गुरू की गद्दी पे
पुनः बैठे
मेरी कामना को  पूरन हे राम
कीजिएगा/
   (2)
लाख उङाने सब भरते हैं सजन यहाँ पर कौन बना ?
आदर्शों की बात छेङकर लखन यहाँ पर कौन बना?
सोच रही क्यों खङी तवायफ बाजारों में अबला सी ?
हूस्न और जाम सभी चखते हैं सजन यहाँ पर कौन बना ?
     (3)
सुरभित हैं कथानक कथ्य लिख रहा हूं
बातों में भ्रम नहीं तथ्य लिख रहा हूं
सियासत की चालों में रंगो न मुझको
मेरा नाम सत्य है सत्य लिख रहा हूं ।
   रचनाकार-विनय शुक्ला
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