#Kavita by Vinita Badmera

स्वार्थ की दुनिया

 

बहुत दिनों बाद बूढ़ी काकी  को,

भर-पेट भोजन  करवाया है।

दाल-भात के साथ हलवा परोस,

बेटा आज समीप भी आया है।

 

वत्स को आशीष देती काकी

का   मन फूला नहीं समाया है।

अश्रुओं से भीगी पलकों को,

पौछ  मन   को  हर्षाया है।

 

हर दिन महीने का पहला दिन

क्यों नहीं ईश्वर ने बनाया है?

यह सोच उसनेे पेंशन पर

खुशी सेअंगुठा भी लगाया है

 

वाह रे!स्वार्थ की   दुनिया ,

अजब तेरी ये  माया   है।

बहुत दिनों बाद  उसके

पुत्र ने हृदय से   लगाया है।

 

वीनू

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