#Kavita by Vinita Rahurikar

आवाज….

 

नहीं मैनेँ अनसुना नहीं किया

उस आवाज को

जो मेरे भीतर से

उठती थी…

 

हर बार मैंने

बहुत ध्यान से सुना

समझा, और अमल किया

उसकी बात पर…

 

क्योंकि वही थी जो

मुझे समझती थी

जानती थी

सबसे बेहतर, सबसे बढ़कर

मुझे पूरा विश्वास था उस पर…

 

तभी मै आज भी

सुनती हूँ पूरी ईमानदारी से

उसकी आवाज

चलती हूँ थामकर

उसका हाथ…

 

पूरा सम्मान देती हूँ

मैं उसे,

आज जो भी हूँ

सिर्फ उसी आवाज की वजह से हूँ

वह आवाज

जो सुन सकती हूँ सिर्फ मैं

मेरे स्व की…

 

डॉ विनीता राहुरीकर⁠⁠⁠⁠

 

 

 

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