#Kavita by Vinod Bairagi

नजरो के सामने नजारे  कैसे बचाया जाए
लगा दाग इस दिल पर  वो कैसे छुपाया जाए

ऐसास नहीं है  जिन्हें अपनी ही गलती का
क्यों ना उन्हें फिर से आइना दिखाया जाए

इन अंधेरों में हमे चलने की  आदत तो नहीं हे
किस  तरह  ये उन्हें ये अब समझाया जाए

खंज़र  रखते हैं  जो अपने कलम वालो इन हाथों  में
उन्हें फिर किस तरह गुलाब थमाया जाए

जिन्हें शर्म तो  नज़र आती  ही नहीं अब
चलो इनकी नजरो के सामने अपनी नज़र को झुकाया जाए

जिन्हें परवाह तक भी नही तेरी ज़रा सी
उन्हें यादो  में क्यों  बिठाया जाए

मोहब्बत में ये दिल हो गया अब दीवाना
अब इश्क़ से क्यों न मिलाया  जाए

✍🏻
*विनोद बैरागी*
*शाजापुर मप्र*
*7697462007*

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