#Kavita by Vishal Ajmera

कुछ सिख ले

***

ज़िंदगी में क्या कमी है
पल मुस्कराना सिख ले ।
हसरतो की दुनिया है पगले
सपने सजाना सिख ले ।

मुकद्दर से रंजिश जो भले हो
हौसला बनाना सिख ले।
काम की न दुनियादारी तो
दूरियाँ बढ़ाना सिख ले।

हर मोड़ पर रास्ता न होता
मन को लुभाना सीख ले।
क्या अच्छा, क्या बुरा
ज़िन्दगी में आना सिख ले।

मिट जाए कायनात भले ही चिंगारियों में
मौसम बन जाना सिख ले ।
चमकते तारो में कही गम छिपा
बादल बन जाना सिख ले।

कहते है
दूरियाँ अपनों से होती है
मासूम बन जाना सिख ले ।
कभी बिछड़े थे जो आज मिले
खजाना यादों का कमाना सिख ले ।

चश्म-ए-बददूर सोज़-ए-मोहब्बत
आहोश में आना सिख ले ।
कुछ दिनों की ज़िन्दगी गिरवी रखी है
बंदिशे छुड़ाना सिख ले ।

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