#Kavita by Vishal Narayan

दीपोत्सव की

 

हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

 

 

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हाथ दोनो जोड़के मैं नवाउं शीश

 

हे गणाधीश, दो न आशीष….

 

 

धवल होवें मन मटमैले

 

ज्ञान का उजियारा फैले

 

द्वेष कभी न मन में पालूं

 

इस बालक को दो सीख

 

हे गणाधीश, दो न आशीष….

 

 

हरदम खुलके मुस्काउं

 

थोड़े में खुश हो जाउं

 

रंज के तीखे घुंट मैं पी लूं

 

पर कभी न उतारुं खीस

 

हे गणाधीश, दो न आशीष….

 

 

काम मेरा तुम इतना करना

 

जग के संकट पल में हरना

 

हे गौरी पुत्र अनुकंपा करो

 

सदा सदा प्रसन्न रहें गौरीश

 

हे गणाधीश, दो न आशीष….–” विशाल नारायण “

 

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