#Kavita by Vishal Narayan

-“मैं ओस का मोती”—

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मैं इक ओस का मोती हूँ

जिसने बस बिखरना जाना है.

 

बरसना है सारी रात मुझको

सूबह मोती सा जगमगाना है

भरकर मुस्कुराहटें चेहरों पर

बहती हवाओं में खो जाना है

मैं इक ओस का मोती ….

जिसने बस बिखरना जाना है.

 

मैं रहूँगा हरपल संग में उसके

जिस को मैंने अपना माना है

बिखरूँगा कभी हँसी बनकर

या पलकों पे झिलमिलाना है

मैं इक ओस का मोती ….

जिसने बस बिखरना जाना है.

 

है मेरी इक ख्वाहीश छोटी सी

ये सारा जहाँ सून्दर बनाना है

अपने रंगों में खुद को खोकर

सतरंगी इन्द्रधनूष बन जाना है.

मैं इक ओस का मोती ….

जिसने बस बिखरना जाना है.

 

चंद साँसों का जीवन  है मेरा

कुछ पलों का आना जाना है

मुझे बसकर दिलों में सबके

युगों – युगों तक मुस्कुराना है

मैं इक ओस का मोती …

जिसने बस बिखरना जाना है.

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