#Kavita by Vivek Dubey Nishchal

नैना नैनन के प्यासे ।

अधर अधरन के प्यासे ।

 

प्रीतम की इन यादों में ,

स्पंदन साँसों के साजे ।

 

आ जाएं प्रीतम मोरे ,

भा जाऊँ मैं मन में ।

 

ये मन भागे ,

मन के आंगे ।

 

राह तकी है जन्मों से ,

जन्म जाने कितने आंगे ।

 

पाकर एक छवि प्रीतम की ,

खो जाऊँ मैं बस प्रीतम में ।  …. विवेक दुबे”निश्चल”

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