#Kavita by Vivek Dubey Nishchal

मरा नही रावण ,
अब भी जिंदा है ।

करते रावण ही,
रावण की निंदा है ।

रखकर मन में ,
जला रहे हम पुतले को ,

बार बार दहन पर,
रावण होता शर्मिंदा है ।

….. विवेक दुबे”निश्चल”

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