#Kavita by Vivek Prajapati

देश के भविष्य का सृजन करना था जब

तब  तुम  सब   भूतकाल   में   पड़े  रहे।

जन-जन जब तन मन धन  से  लगा था

तब  कालेधन  के  विशाल  आँकड़े  रहे।

जब राष्ट्रवाद की लहर में  बहा  था  देश

तब  धर्मवाद   जातिवाद   पे   अड़े   रहे

पूरा देश देशद्रोहियों को गाली दे रहा था

तुम  देशद्रोहियों  के  साथ  में  खड़े  रहे।

 

विवेक प्रजापति – काशीपुर (उत्तराखण्ड)

 

 

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