#Kavita by Vivek Prajapati

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“साक्ष्य नहीं है यह सेना के अमर शौर्य की गाथा है

भारत की इस सेना से ही, उन्नत अपना माथा है।”

 

भारत की सेना बलिदानी परिपाटी की वाहक है

भारत का जो सैनिक है, भारत का सच्चा नायक है।

 

सेना अपनी सिद्धहस्त है, कुशल शस्त्र संचालन में

पर वरीयता देती है, पहले संयम के पालन में।

 

जो भारत के संस्कार हैं, उन्हें अशुद्ध नहीं करती

भारत की सेना वैरी से, पहले युद्ध नहीं करती।

 

किन्तु कृष्ण की इस भू पर, जब कभी आक्रमण होता है

होता है पालन गीता का, तत्क्षण ही रण होता है।

 

भारत की सेना जब जब, रण के पथ पर बढ़ जाती है

ऊँचे हों पर्वत तो क्या वह आसमान चढ़ जाती है।

 

जब वैरी के अरमानों की, युद्धभूमि सज जाती है

भारत की सेना तब अपना रौद्ररूप दिखलाती है।

 

पर भारत के कुछ लोगों को, तनिक नहीं यह भाता है

सेना के इस रौद्र रूप से, उनका गहरा नाता है।

 

जब जब भारत के सैनिक सीमा पर शौर्य दिखाते हैं

तब तब ये कुछ लोग इसी सेना पर प्रश्न उठाते हैं।

 

आतंकी आकाओं के संदेशे पारित करते हैं

जो वैरी कहता है वही वाक्य उच्चारित करते हैं।

 

राजनीति के मनभावन झूले में ऐसे झूल गए

निजी स्वार्थ के वशीभूत हो सभी देशहित भूल गए।

 

बनकर सभी विभीषण अपना घृणित रूप दिखला बैठे

जिससे नफ़रत करनी थी ये गीत उसी के गा बैठे।

 

इनकी कलुषित वाणी को भारत माता पर वार कहो

नाम कदापि न लो इनके, इनको तो बस गद्दार कहो।

 

जो इनपर रीझेंगे वो भारत को खंजर घोंपेंगे

वे सब अपराधी होंगे जो सत्ता इनको सौंपेंगे।

 

जितनी बार चुने जाएंगे उतनी बार कहूँगा मैं

जो इनको चुन लेंगे, उनको भी गद्दार कहूँगा मैं।

 

कृपया नाम सहित मूल रूप में ही शेयर करें।

 

विवेक प्रजापति

वैशाली कॉलोनी

काशीपुर (उत्तराखण्ड)

9720081882

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