#Kavita By Vivek Prajapati

आज फिर ठहरे हुए तालाब में हलचल हुई थी
मछलियों को यह लगा घड़ियाल पकड़ा जा रहा है।

इस ख़बर से मेढकों की
टरटराहट बढ़ गयी थी
फ़ौज कछुओं की अचानक
पत्थरों पर चढ़ गयी थी।

फुसफुसाहट थी वहाँ, तालाब के सब प्राणियों में
केकड़ा अब यह ख़बर घड़ियाल तक पहुँचा रहा है।

जनसभा की योजना में
सब शिकारी जानवर थे
मछलियां, कछुए व मेंढक
इस ख़बर से बेख़बर थे।

हो चुका प्रस्ताव पारित, धर्म है खाना हमारा
हम सभी तैयार हैं, परिणाम जो भी आ रहा।

तब अकारण मछलियों का
झुण्ड भी ख़ुशहाल ही था
मछलियां तो मछलियां
घड़ियाल तो घड़ियाल ही था।

भूख से बेहाल है घड़ियाल भी लम्बे समय से
फिर हमेशा की तरह वो मछलियों को खा रहा है।

विवेक प्रजापति
काशीपुर (उत्तराखंड)

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