#Laghu Kahani by Jitendra Kumar Gupta

“ईमान की चिन्ता”

 

“आओ आओ दीनू ,कैसे हो।” बैंक मेनेजर ने दीनू किसान को देखकर कहा !

“”ठीक हूँ मेनेजर साब ।”

“कहो कैसे आना हुआ?”

“साब बिटिया का ब्याह है पचास हजार का कर्ज चाहिये।”

” हाँ हाँ क्यों नहीं । तुम तो हमारे पुराने ग्राहक हो ।

और ये क्या कभी पच्चीस हजार कभी पचास हजार कर्ज माँगते रहते हो।”

“….”

“अरे मेरा मतलब है तुम्हारे लाखों के खेत को तो गिरवी रखना ही.पड़ता है तो एक साथ ही चार पाँ लाख लोन लेलो। कुछ हमारा भी भला हो ।” बैंक मेनेजर कुटिलता से मुस्कुराया।

” नहीं नहीं साहब इतना नही चाहिये।”

“अरे जब.हम खुद दे रहे है तो लेते क्यों नहीं?”

“गरीब हूँ न साहब कर्जा चुकाना भी चाहता हूँ।”

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जितेन्दर कुमार गुप्ता

इंदौर-

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