#Laghu Katha by Anshu Kumari

बहुत पहले की लिखी मेरी एक सच्ची लघुकथा………..

 

आज ईद हैं..

मेरा मन भी सेवई खाने का हुआ

मैं अपने पति से बोली…मुझे दूध चीनी और

सेवई ला दो, आज ईद हैं मेरा मन भी

सेवई खाने का कर रहा हैं,

पति बोले अभी अच्छे दिन नही आये हैं,

हम आम आदमी को आज

प्याज रोटी खाना मुश्किल हो रहा हैं,

और तुम सेवई खाने की बात कर रही हों

, मैं बोली आज ईद हैं ,थोड़ा ही सही पर ला दो.

..मेरा मन कर रहा हैं….काफी कहने पर

पति जी राजी हो गए…बोले देखता हूँ…….

…मैं उनके बाजार से लौटने का बेसब्रि

से इन्तजार कर रही थी.

तभी पति जी बाजार से आ गए…

…उनके हाथ मे

टमाटर देख मैं फूली न समाई..,बोली

अच्छे दिन आ गए क्या, या हम अमीर हों गए..

…….और सेवई कहाँ हैं………

…..पति बोले नही ला पाया….

…..मैं बोली क्यों…जितना

का टमाटर खरीदे उतना मे क्या सेवई नही आता……

…वे बोले जरूर आ जाता……

…..मैं बोली फिर लिये क्यों नही……

…..

पति बोले मैं गया तो था सेवई लाने ही

….पर रास्ते में एक

टमाटर बाला मिल गया. .

.कहने लगा भाई साहब टमाटर ले लो

महँगा होने की बजह से कोई इसे खरीद नही रहा….

आज ईद हैं…..अगर ये आज भी नही बिका

तो मैं अपने बच्चो के लिये सेवईया

नही ले जा पाऊगा……

साहब गरीब के बच्चे साल भर से इस दिन

का इन्तज़ार करते हैं………

साहब अगर ये टमाटर आज भी नही बिके तो…..

मैं अपने बच्चो के लिये सेवईया

नही खरीद पाऊगा साहेब…………….

सच अंशु आज सेवईया की उसे ज्यादा

जरूरत थी….इस लिये मैंने उसके

टमाटर खरीद लियें……पति की बातो को

सुन कर मेरी आँखे भर आई……

…..मैं बोली कोई बात नही………

…आज पहली बार बिना सेवई खाए.

…मुँह मीठा हों गया….और पति जी ने मुझे

प्यार से गले लगाते हुए कहाँ…ईद मुबारक.

 

©अंशु कुमारी

 

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