#lekh by Ajeet Singh Avdan

मन की बात ( भ्रष्टाचार )

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माननीय मुख्य मंत्री श्री आदित्यनाथ योगी जी के आवास पर पहुँचते-२ साँझ हो चली थी, दो दिन से क्रोध के कारण नहाया-खाया भी नहीं था, मिलने की अनुमति माँगने पर पता चला कि वे रात दस बजे तक आवास पर आएँगें सो गेट के पास ही धरना देने जैसी अवस्था में बैठ गया,कई लोगों ने बहुत पूँछा कि बात क्या है किन्तु यह कहकर टालता रहा कि मैं अपनी बात सिर्फ उनसे ही बताऊँगा ।

सामने से आती कार को रास्ता देने के लिए मुझसे कहा गया तो मेरे न उठने पर दो लोग मुझे उठाकर किनारे करने लगे, इसी दौरान कार की खिड़की का सीसा खुला और मन्त्री महोदय की आवाज आई इन्हें अन्दर लेकर आवो ।

हाथ जोड़ कर अपना परिचय देते हुए मैने अपनी बात कहनी आरम्भ की, श्रीमान जी हर तरफ फैले भ्रष्टाचार से आम लोगों का जीना मुहाल है,क्या इस पर रोक लगाना इतना मुश्किल है,रात दिन मेहनत करके चार पैसे जोड़ने वाला आम आदमी अपने परिवार के गुज़ारे से अधिक इस बात को लेकर परेशान है कि फला सरकारी काम के लिए संबन्धित अधिकारी को जाने कितना घूस देना पड़ेगा ।

आप अपनी समस्या बताइए, श्रीमान जी की प्रकरण की गम्भीरता को ताड़ती आवाज सुनकर मैं एक पल के चुप हो कर कहना आरम्भ किया, श्रीमान जी समस्या स्वास्थ्य विभाग से है,जिसकी रीढ़ कही जाने वाली आशा-बहुएँ अपने अधिकारियों द्वारा की जाने वाली मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से त्रस्त हैं ।

पहले तो आप यहाँ बैठिए फिर हम आगे की बात करेंगे ।

नहीं, श्रीमान जी मैं आपके सामने बैठ नहीं सकता ।

अरे भाई ! आपके सामने खड़े होकर तो मुझे बात करनी चाहिए,मैं कर्जदार हूँ आपका, सुनकर मैं अवाक रह गया ।

यदि आपने मुझे इस काबिल न समझा होता और अपना कीमती वोट मुझे न देते तो मैं आज इस पद पर कैसे पहुँचता, और यदि देखा जाय तो आज आप आए भी इसी हैसियत से हैं कि मुझसे अपना कर्ज़ वसूल सकें सो यहाँ बैठकर आराम से अपनी बात कहिए और साथ में कोई सुझाव हो तो वो भी बताइए ।

इतना अपनत्व-लगाव देखकर मेरी आँखें भर आईं गला खँखार के मैने आगे कहना आरम्भ किया, श्रीमान जी, आशा-बहुओं का मेहनताना उन्हे उनके प्रतिकाम के बदले पर कुछ न कुछ निर्धारित किया गया है,जो कि एक-दो महीने में दो-चार हजार बन ही जाता है, जिसकी पेमेण्ट उन्हें बाउचर बनाकर उनके बैंक-खाते में की जाती है मगर बाउचर बनाने वाला अधिकारी अपने काम के बदले में उनसे हर बार एक निर्धारित धन-राशि वसूल करता है । अपनी नौकरी न गँवाने के डर में जाने कितनी महिलाएँ इस प्रकार प्रताड़ित की जा रही हैं जो कि अति-निन्दनीय बात है,कृपया इस पर उचित कार्यवाही करें ।

क्या इस बात के सबूत हैं आपके पास ?

जी हाँ ! किन्तु मैं सिर्फ अपनी समस्या निवारण हेतु यहाँ नहीं आया हूँ,मैं चाहता तो संबन्धित व्यक्ति को वहीं पर भरे समाज में गलत साबित कर देता किन्तु यह सोचकर यहाँ चला आया कि जाने कितनी महिलाएँ इस दंश को सह रही होंगी, श्रीमान जी छोटा मुँह बड़ी बात, किन्तु कहूँगा अवश्य कि आम लोगों में से ही हर क्षेत्र में कुछ ऐसे लोग तैयार किए जाएँ जो वास्तव में इस भ्रष्टाचार के खिलाफ़ है जो कि संबन्धित शिकायत पर अपने ढ़ंग से जाँच करके पीड़ित की सम्स्या का निराकरण करें, इस काम में होने वाला खर्च सम्बन्धित अधिकारी के वेतन से काटकर निकाला जाय, बाकी आप अधिक समझदार हैं जैसा ठीक समझें, कह कर मैं चुपचाप उनकी ओर ताकने लगा ।

अब आप अपने घर जाइए, जल्द ही मैं इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाऊँगा, जैसे संतावना पूर्ण शब्द सुनकर, उन्हें प्रणाम करते हुए मैं वहाँ से चला आया ।

 

…अवदान शिवगढ़ी

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