#Lekh by Ajeet Singh Charan

”   ये जो रेखा है.”

 

 

आज देश बडी गणितिय समस्याओं से जूझ रहा है पार्टी वोटों के आंकडो के लेके जूझ रही है जीतने वाले सरकार बनाने के जुगाड के आंकडे बैठा रहे है हारने वाले वोटो के प्रतिशत मे उलझे है बैंक वाले ब्याज का इंटरेस्ट बढा रहे है और माल्या और नीरव मोदी जो ले उडे उसकी भरपाई के हवाई सपनो मे खो रहे है ..बोले तो देश की गणित बडी कमजोर हो रही है जोड,बाकी ,गुणा ,भाग ,बिंदू ,व्यास ,त्रिज्या के चक्कर मे आदमी चतुर्भुज हो गया..ऐसी स्थिति में बड़ी देर से एक मोटा भाई और  उनकी टीम के कुछ खिलाड़ी बैठे हैं लेकिन उनका काम केवल यस सर ,जी सर, के आगे नहीं है असली काम मोटा भाई को ही  करना है यहां काम से मेरा मतलब केवल कार्य से ही है धर्म,अर्थ,काम मोक्ष  वाले काम से नही इनके पास जैमेट्री  बॉक्स वगैरा रखा है और ये बड़ी उलझन में है क्योंकि इन्हें एक रेखा खींची है रेखा नहीं जो फिल्मों में अभिनय करती है ये वो रेखा भी नही जो एक बिंदू को दूसरे बिंदु से मिलाती है यह थोडी  सी अलग  रेखा है ये वो रेखा जिससे  एक बिंदू को दूसरे बिंदू से  अलग करने की कोशिश है बस यही चिंता मोटे भाई को  खाए जा रही है दूरी कितना हो? फासला कितना हो?कहीं दूसरा बिंदू ज्यादा बुरा तो नहीं मान जायेगा पार्लियामेंट्री की बात होती, या दिल्ली की बात होती तो खींची जाती पुरे देश में खींचनी है दो फाड करने हैं देश का मूल्यांकन करना है, देश में कुछ सुविधाएं जुटानी हैइन सबका आधार यह रेखा ही तो है  ।इस रेखा का नाम है “गरीबी रेखा” जिसे कुछ लोग “पुअर लाइन “भी कहते हैं ।यह रेखा हर बार सरल रेखा होने का प्रयास करती है लेकिन संयोग से वक्र  रेखा हो जाती है ।लेकिन इसके अपने कुछ नियम और कानून है यह रेखा एक आर्थिक खींचाव  है ,एक आर्थिक परिस्थिति है ,कुछ लोगों को  इसके ऊपर होना है और कुछ लोगों को इसके नीचे होना है। बीच में किसी को नही रखने का ।लेकिन दुविधा यह है कि हर आदमी इस  रेखा के नीचे से होकर गुजरना चाहता है।रेखा उपर हो तो नीचे वाले को  एक छत मिल जाती है। सुरक्षा मिल जाती है कि चलो एक रेखा तो सिर पर है ।

जो लोग हथेली की रेखा लिए ज्योतिषियों के यहां   चक्कर लगाते हैं  वो आजकल महामूर्ख माने जाते हैं स्याणा आदमी वही है जो ग्राम सेवक और वार्ड मेंबर के पास चक्कर लगाता है कि हमें कि “भैया हमे भी तनिक इस रेखा के नीचे ले लीजिएगा”तो  हमें भी चैन से बंशी.बजाने  का अधिकार मिल जायेगा ,हम भी सुकून से कह सकेंगे कि हम इस रेखा के नीचे है ।लाख बढे महंगाई हमारा क्या बिगाड़ लेगी? हम तो दो रुपए किलो गेहूं और चावल खाते रहेंगे ।आप लोगों के लिए होगी बेरोजगारी हमारे बच्चे तो फ्री मे  पढ़ेंगे ,फ्री मे चिकित्सा लेगे ,फ्री  में मकान बनाएंगे बिना ब्याज का लोन लेंगे और जो भी हमसे होगा हम करेंगे ,केवल एक रेखा भर हमारे ऊपर हो हमें उसके नीचे होने का मांगता । हमें  BPL करने का मांगता ।हमें एपीएल नहीं रहने का ,इधर काफी दिन रह लिये APL देख लिया कोनो फायदा नाहीं । तुमसे करने का बनता तो  हमें BPL करने का । बस यही चिंता खाए जा रही है मोटे भाई को किसे  BPL करें ,किसे ना करें ।

करें तो क्या करें ..क्या मानक बनाये..बड़ी देर तक   सिर खुजाया,चांद पर हाथ फेरा,चश्मे को उपर नीचे किया ,कुछ सुझा नहीं तो वेटर से चाय मंगवाई तीन  चार चाय पीने  के बाद   उन्हें लगा कि कुछ बात बन सकती है ।पर साला दिमाग काम नही कर रहा था चाय वाले ने कहा “मोटा भाई काहे की लाइन खिंचने का ” ‘गरीबी रेखा बनाने का रे बाबा’  मोटा भाई ने जवाब दिया । चाय वाला बोला “जान की अमान बख्शो तो हम कोई उपाय बतायें मोटा भाई” मोटा भाई काफी परेशान थे बोले “हां बता”  चाय वाला बोला ‘मोटा भाई मेरी चाय के 26 रूपये हुवै,  इस देश मे 26 का बहुत महत्व है। 26 जनवरी 1930 को पहली बार तिरंगा फहराया 26 नवंबर 1949 को हमारा संविधान अंगीकृत हुआ  26 जनवरी को संविधान लागू किया गया ।आप मेरी चाय के 26 रुपये यादगार बनाने के लिए  चाहें तो इस रेखा का मानक 26 रूपये ही रख दो  । यानी जो ₹26 से ऊपर है APL जो नीचे है वह BPL जो आदमी प्रतिदिन ₹26 कमाता है APL की श्रेणी में है और जो ₹26 नहीं कमाता है वह BPL है ।अब समझ में नहीं आता कि जो आदमी कमाता तो कम है पर उडाता ज्यादा है वह किस श्रेणी में आयेगा ?लेकिन उम्मीद रखो मोटा भाई उसके  लिए भी  कोई अलग से वृत ,त्रिभुज या लाइन जरूर बनायेगा

बस अपुन एक बार इस रेखा के नीचे आने का मांगता ….

©अजीत सिंह चारण

रतनगढ (चूरू)

9462682915

 

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