#Lekh By Anand Singhanpuri

पद्मा श्री हलधर नाग–
जीवनी
महान कवि पद्मा श्री से सम्मानित श्री हलधर नाग जी का जन्म 31 मार्च 1950 में ओड़ीसा राज्य में हुआ था | इनके पत्नी का नाम मालती नाग है। श्री हलधर नाग  जी कोसली भाषा के एक बहुत ही मशहूर कवि और लेखक हैं। यह नाग जाति से आते है। नाग जी को बहुत कम सोशल मीडिया में व लोग जानते है।तथा यही नहीं इनकी तुलना गंगाधर मेहर से की गई है । व नाग “लोककवि रत्न”  के नाम से भी जाने जाते है।
संस्मरण
बीबीसी द्वारा इनके जीवन की घटनाओं व कार्यों की उपादेयता को लेकर एक वृत्तचित्र फिल्म बनाई गई है । इनकी सबसे ख़ास बात यह है की आज तक इन्होने जितनी भी कविताएं और महाकाव्य लिखी है वो सब इन्हें  ज़ुबानी याद हैं। हलधर नाग  को भारत सरकार की तरफ से सन 2016 में पद्मश्री  से सम्मानित भी किया गया गया है ।

जन्म और बचपन

नाग जी का जन्म 31 मार्च सन 1950 को उड़ीसा के बरगढ़ जिले में गेन्स के एक गरीब परिवार में हुआ था। इन्होने दस साल की उम्र में हीं अपने पिता को खो दिया था । इनके पास केवल तीसरी मानक तक की हीं औपचारिक स्कूली शिक्षा थी, क्योंकि पिता के मृत्यु के बाद इन पर अपने परिवार की जिम्मेदारियां आ गई थी जिसके कारण इनके कक्षा तीन के बाद हीं अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी । घर और खुद को खिलाने के लिए इन्होने दो साल तक पास के होटल में डिशवॉशर की नौकरी की थी।
उसके बाद में गांव के सरपंच की मदद से इन्हें गांव के हीं हाई स्कूल के हॉस्टल में एक कुक की नौकरी मिल गई जिसमे इन्हें 8 रूपए महिना मिलता था । लगभग 16 वर्षों तक इन्होने वहां काम किया । उसके बाद इन्होने बलंगिर ग्राम बैंक से 1000 रुपये का loan लेकर उससे अपना एक छोटा सा स्टेशनरी दुकान खोल लिया।
साहित्यिक लगाव
बचपन से हीं नाग को देशी लोक गीतों के प्रति झुकाव रहा था और ये कृष्ण गुरू भजन, दल खाई, रसराकली, मायाला झाड़ा और कई अन्य लोगों के गायन में भी काफी सहज थे। गायन के अलावा इन्हें लिखने और दूसरों की किताबे को भी पढ़ाने का शौक था। हलधर नाग हमेशा सफ़ेद कपड़े, सफेद धोती और बनियान में रहते है । यही नहीं ये हमेशा नंगे पांव ही रहते हैं। धीरे-धीरे इन्होने कविता लिखने की दिशा में अपनी रूचि को विकसित किया । उसके बाद ये अभिमन्यू साहित्य संसद नामक एक समूह में शामिल हो गए ।
साहित्यिक यात्रा
नाग की सबसे पहली कविता थी “धोडो बारगाछ” जिसका मतलब होता है “केले का पुराना पेड़” । इनकी ये पहली कविता 1990 में एक स्थानीय पत्रिका में प्रकाशित की गई थी । कुल मिलाकर इन्होने पत्रिका को 4 कविताएं भेजीं थी जिसमें से सभी कविताओं को प्रकाशित किया गया था । अपने 66 साल की उम्र में नाग ने जितनी भी कविताएं लिखी वो सब इन्हें कंठस्थ है और अब तक इन्होने 20 महाकाव्य भी लिखे है और वो सभी भी इन्हें जुबानी याद हैं। इनके बारे में कहा जाता है की आप केवल इनके सामने इनके कविताओं का नाम लीजिये ये आपको मुंह जुबानी बिना कुछ भूले सब कविताएं सुना देंगे। इनके इस हुनर के लिए कुछ समय पहले इन्हें देश के राष्ट्रपति “प्रणब मुखर्जी” द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पदमश्री और पदमभूषण से भी नवाजा गया हैं ।अपने एक साक्षात्कार के दौरान श्री हलधर नाग ने कहा था की ये जान कर काफी ख़ुशी होती है की आज के नौजवानो को “कोसली भाषा” में भी रूचि है ।  हलधर नाग का कहना है की मेंरे हिसाब से हर इंसान कवि होता है लेकिन केवल कुछ हीं लोग के पास ऐसी कला होती है की वो अपनी कविताओं को आकार दे सके ।
जन्मदिवस विशेषांक
~आनन्द सिंघनपुरी,युवा साहित्यकार
रायगढ़।

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