#Lekh by dinesh pratap singh chauhan

चुनाव

चुनावों में किसीकी हार किसीकी जीत तय है यानी कहीं जीत की ख़ुशी मनायी जानी हो तो उसके लिए कहीं हार का गम होना जरूरी होता ही है। लगता है लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की भूमिका दूसरों को जीत की ख़ुशी देने के लिए स्वयं हार का मातम मनाने तक सीमित होकर रह गयी लगती है। कहीं भी चुनाव होते हैं कांग्रेस पूरे  दम ख़म के साथ उपस्थित होकर हुंकार भरती  है कि लो हम आ गए हैं हिम्मत है तो हमें हराकर देखो और कोई ना कोई दल  उन्हें हरा देता है और वह फिर से अगले चुनावों की हार के लिए तैयार होने चल देती है। हमारा तो स्वभाव ही ऐसा हो गया है कि हम महान लोगों की महानता को कभी पहचान ही नहीं पाते। अब ज़रा बताएं अगर कोई पार्टी दूसरों की ख़ुशी के लिए स्वयं अपने घर मातम की परवाह नहीं करती तो क्या उसकी महानता के चर्चे नहीं होने चाहिए ?लेकिन नहीं हम उसकी महानता के चर्चे करने के बजाय उसमे उसकी कमी या दोष ढूढने लग जाते हैं।
कांग्रेस की हार इस मायने में भी एक अद्भुत चमत्कार कही जा सकती है कि वह निरंतर हारती जाती है लेकिन उसे अपनी हार का सही या प्रमुख कारण पता ही नहीं चल पा रहा है। अब कोंग्रस की हार का कारण गांधी नेहरू परिवार तो हो ही नहीं सकता क्योंकि वह तो केवल जीत का कारण होने के लिए ही नियत है। तो फिर कांग्रेस अपनी हार का कारण कहीं और ढूंढने निकल पड़ती है। कभी पुराने कोंग्रेसियों को हार का कारण मानती है कभी नए कोंग्रेसियों को। लेकिन कुछ समय बाद रिपोर्ट आती है कि उसकी हार का कारण कोई और नहीं है उसकी हार का कारण उसके खुद के कम कांग्रेस हो जाने के कारण हुयी है। याने वजह यह रही कि उसने अपने लम्बे शासन काल में सारे देश व सारे दलों का इतना कांग्रेसीकरण कर दिया है कि दूसरे दल उससे कहीं अधिक कांग्रेस हो गए हैं और वह उनसे कम  कांग्रेस हो जाने के कारण हारती जा रही है।
पिछले दिनों एक  उड़ती उड़ती चर्चा यह भी   रही कि उसकी हार का एक कारण उसके युवराज का कुंवारा होना भी हो सकता है क्योंकि जनता शादीशुदा होने को ही परिपक्वकता की निशानी अधिक मानती है इस  वजह से पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस ने पार्टी की हार पर ध्यान देने के बजाय अपने युवराज की शादी पर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया है। आशा है युवराज की घुड़चढ़ी के बाद शायद कांग्रेस फिर से पूरी तरह कांग्रेस हो जाय और देश काभविष्य  पुनः अपने हाथ में लेकर देश को स्वर्ग और हम सबको स्वर्गवासी बनाने में जुट जाए।
शुभम करोति कल्याणम    -दिनेश प्रताप सिंह चौहान

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