#Lekh by Dr. Arvind Jain

हम न सुधरेंगे और न सीखेंगे

हम भारतवासी  बहुत अच्छे गुणोंके धारी जीव हैं जंतु नहीं .हमें या हमारे खून में विरोध करने की आदत हैं ,हमको नियम को तोड़ने में मजा आता हैं ,जैसे हम कुछ भी भले के लिए बोले पर पाकिस्तान /चीन को विरोध करना . ऐसे ही हमारे देश में यदि किसी सुधार की बात करे ,कहने या सुनने के पहले विरोध ,समझना नहीं .कारण हमारा खून ख़ास तौर पर अस्सी के दशक के बाद की नस्ल का यही हाल हैं . और फिर नव धनाड्य कोकुछ भी बात या सलाह पसंद नहीं .

पहेली न बुझा कर सीधे बात कहता हूँ कि सांसद यादव ने शादी का खर्च कम करने कि बात क्या कह दी जैसे भूचाल आ गया .उस  आग पर घी का काम जम्मू कश्मीर कि मुख्य मंत्री ने कह दिया महंगी शादियों पर रोक इससे जिनकी शादी हो चुकी वे इतने परेशां हैं जैसी उनको दूसरी शादी करना हो.

कुछ नए रईसों का कहना हैं कि शादी और उस पर शान शौकत व्यक्तिगत मामला हैं इस पर सरकारीकरण नहीं होगा या होना चाहिए. ,सही भी हैं .पहली शादी एक बार शादी उसमे कंजूसी कैसे होगी. ? हम दिल खोलकर ,कलेजाचीयर कर शादी करेंगे. अरे भाई खूब करो पर दूसरे कि परेशानी को समझो. भगवान् की दया से  और पूर्व जन्म का संचित पूण्य और बाप की कमाई से इतना शौक चर्रा रहा हैं .ठीक हैं आप खूब मौज से करो पर उनकी तरफ गौर फरमाएं जिनके यहाँ खाने के लाले हैं या मध्यम या निम्म आय वर्ग के लोग हैं उनके ऊपर रईस धन्नासेठों की देखा देखी करने को मजबूर हो जाते हैं . बाह्य ताम झाम  में फ़िज़ूल खर्ची करने की अपेक्षा सादगी के साथ गरिमामय कार्यक्रम करे और जिस पैसों की बचत कर सकते हो करों. आज शादियों में पचास पचास स्टाल लगा कर अपनी शान बताते हैं ,मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि आप दूसरों के यहाँ कितना खाना खाते हैं और आप कितना स्टाल लगाते हैं . ? सोचनीय बात यह हैं आज भी भारत में करोड़ों लोग बिना खाना खाये रात में सोते हैं . क्या हम उनको अपना आदर्श मान कर अपना कार्य संपन्न नहीं कर सकते.?

में कभी नहीं कहता कि आप अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल काम करे. अच्छा से अच्छा करे ,खूब दिल खोल कर करे क्योंकि भगवान् ने दिया हैं .पर सब दिन सबके एक से नहीं जाते . कब करोड़पति रोड पति हो जाए.? अर्श से फर्श पर आ जाए. में उस सभी जनों से कहता हूँ कि आप किसी बात को पूरी तरह गंभीरता से समझे बिना प्रतिक्रिया दे पर विरोध नहीं , हम सीखने को तैयार नहीं . और न सुधारने को . गुजरात में   सब घराती  और बाराती अपने घर से टिफ़िन लेकर गए और मिलकर खाना खाया .एक आई .ए एस ने कोर्ट मैरिज कर टी पार्टी की और फिर आप आनंद से मौज करो. क्या हम इनसे कुछ नहीं सीख सकते .बस हम्मे आत्म विश्वास हो  और कौन क्या कहेंगा कि धारणा को खूंटी पर तान दो .कौन को किसकी शादी कितने दिन याद रहती हैं और अच्छे से अच्छा व्यंजन बस जिव्हा के नीचे गया और खेल ख़तम और कितना सजावट ,कितनी ऊँची शहनाई और गायन  का अहसास कितनी देर और कितने समय .बस इसके अलावा हम जैसे के द्वारा दो शब्द मीठे बोल दिए तो आपने वाह वाह कह दिया.

बिंदु का में नाकारत्मक पहलु पर बात नहीं कर रहा हूँ ,जिनके पास हैं वो थोड़ी दयालुता उनकी और भी करे जो सामान्य ढंग से अपना जीवन निर्वाह नहीं कर सकते वो इतना खर्च कैसे उठाएंगे , ? मेरे द्वारा किसी की भावना को ठेस पहुंचाहना नहीं है और न मेरी बात मानेगा पर में सिर्फ अहसास दिल रहा हूँ कि यदि मितव्ययता से काम चल जाये तो उसमे देश समाज और व्यकिगत परिवार को लाभ हो सकेगा और राशि आप अच्छे पारमार्थिक कार्यो में लगाए या स्वयं का व्यापार कर अन्य को स्वाबलबन दे सकते हैं .हमारे देश केंकड़ा प्रधान हैं ,सब एक दूसरे कि टाँग खींचना  चाहते हैं और भगत सिंह चाहते हैं पर  पडोसी के यहाँ .इसकी शुरुआत हम अपने घर से क्यों न करे ? सुधरे और सीखे अच्छी बातें ? सुरुआत करके  देखो .

डॉक्टर अरविन्द जैन प्रान्तीय अध्यक्ष लेखक प्रकोष्ठ मध्य प्रदेश एवम शाकाहार परिषद् भोपाल 09425006753

199 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *