lekh by sandeep kumar

सुरा देवभूमि और असुर

मित्रो आज अचानक एक लेख लिखने का मन हुआ तो सोचा पहाड़ की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण क्या है इस पर विचार करता हूँ
बहुत सोचा पलायन भ्रष्टाचार बेरोजगारी आखिर क्या है वो कारक जो पहाड़ जैसे स्थूल को शून्य में धकेल रहे तो बस मन में एक ही ख्याल आया वो कारक है सुरा
अर्थात् शराब
सुरा ही वह कारक है जो देवभूमि के जनमानस के ह्रदय में आसुरिक प्रवृत्तियों अर्थात् अपने अंत:करण को अपवित्र करता जा रहा।
सुरा के प्रभाव में आकर अपनी स्वर्ग रुपी धरा को नरक में परिणत करते जा रहा और अपनी पारिवारिक जिम्मेदारीयों का निर्वहन ना कर अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य को अंधकारमय करता जा रहा।
रोती -बिलखती स्त्रियो माँ बहनो बेटियों की पीड़ा. पीढ़ी दर पीढ़ी बस बढ़ती जा रही।
मदिरा का ये व्यसन देवभूमि को कहीं चिरकाल के लिए असुर भूमि ना बना दे।
प्राचीन काल मे इस भूमि मे सुरा का प्रचलन नही था यही कारण रहा है कि देव ॠषियों की ये तपस्सथली रही है।
मध्यकाल में यह अभिजन वर्ग अर्थात् अमीरो में ही प्रचलित थी 1803 म से यह गोरखा शासन काल में जनमानस में एक छूत की बीमारी की तरह फैल गयी जो अनवरत जारी है और एक ऐसी महामारी की तरह फैल गयी है जिसका कोई इलाज नही दिख रहा है
अंग्रेजी शासन काल में यह लत इस प्रकार फैल गयी जिस प्रकार पेड मे बेलरुपी लता फैलती है
आजादी के बाद भी ये समस्या ज्यों की त्यों बनी है
कई बार महिला आन्दोलन होते है पर परिणाम शून्य
शराब माफियाओ का व्यापार बढ़ता जा रहा और जन मानस की दशा नरक से बदतर
आखिर कब तक रुलाऐगी पहाड़ को सुरा?
कही देवभूमि असुर भूमि ना बन जाऐ
हम अपनी पीढ़ी को कहा ले जा रहे सोचिये जरा?

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