#Lekh by Chandra Kanta Siwal

हमारे बुजुर्गवार हमारी धरोहर , इसे सहेजना होगा

भारतीय संस्कृति और उसका आदर्श सदा ही सर्वोत्कृष्ट रहा है, इससे हमारी परंपराएं और हमारे सामाजिक परिवेश को सकारात्मक दिशा व ज्ञान मिलता है। हमारी परंपरा रही है अपने बुजुर्गों की सेवा व आदर करना। यह हमारी संस्कृति भी है क्योंकि हमारे धर्म चाहे जो भी हों, सम्प्रदाय चाहे जो हों पर सब में अपने बुजुर्गों के प्रति सेवाभाव को पुण्य माना गया है, और हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर है क्योंकि हम ही उनकी पीढ़ी हैं जो उन्हें अपनों के रूप में उनकी याद को संजो के रखते है। जिस घर में बुजुर्ग का साया होता है उस घर के सारे सदस्य सुकून की नींद पाते हैं और सुकून के साथ अपने दैनिक कार्यो की यात्रा पर रहते है लेकिन आज के आधुनिक युग और भौतिकता के साये में बहुत कुछ बदल रहा है जिससे भारतीय संस्कृति के सर्वोत्कृष्ट होने पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। जिस प्रकार आधुनिकता और भौतिकता हम पर हावी होती जा रही है, उससे तो हमारी संस्कृति और हमारे व्यवहार भी प्रभावित होते जा रहे हैं। आज के परिवेश में अपने बुजुर्गों की सेवा के लिए नौजवानों और वयस्कों दोनों ही के पास समय का अभाव होता जा रहा है और भावनाएं भी कठोर सी बनती जा रही हैं। आज जिस तरह वृद्धाश्रम में भीड़ और बुकिंग दोनों चल रही हैं उससे समझा जा सकता है कि वर्तमान पीढ़ी कितनी संवेदनशून्य होती जा रही है। बहुत से परिवारों में आज ऐसी स्थिति आ गयी है कि अपने बुजुर्गों के लिए समय नही मिल पा रहा और पैसे के बल पर बुजुर्ग माता पिता का सुख सेवा खरीदा जा रहा है। ऐसे घरानो के बुजुर्ग वृद्धाश्रम में पहुंचा दिए जा रहे हैं या फिर घर की एक कोठरी में रख भाड़े के सेवार्थी के ज़िम्मे सौंप दिए जा रहे हैं। अजीब स्थिति बन गयी है आधुनिक युग की, जिसने हमें पाला पोसा,पढ़ाया लिखाया, कामयाब बनाया,जन्म से लेकर सफलता के शिखर तक पहुंचाने में कितने कष्ट सहे, आंसू बहाए, इसका आकलन नहीं किया जा सकता लेकिन जब उनके लिए आंसू निकालने की बात आई तो हम आधुनिकता की गिरफ्त में आकर सब भूल गए।सिर्फ अपने ही सुख, आराम को प्रथम समझने लगे।बुजुर्ग हमारे बेशकीमती अमूल्य हीरे हैं, इनकी सुरक्षा हमारा ही कर्तव्य है किसी सेवार्थी का नही, हमें ये समझना होगा।एक उम्र के बाद हमारे वटवृक्ष बुजुर्गवार हमारे द्वारा दी गई भौतिक सुख सुविधाओं से नहीं बल्कि हमारे दिए गए प्रेम भाव, अपनत्व और सम्मान से सुखी रहेंगे एवं उनकी छाया में हम अपनी जीवन रूपी धूप में भी सुउख महसूस कर सकते हैं। हर व्यक्ति को ये समझना होगा कि बुजुर्गों का किया गया सम्मान उनके लिए नही, यह हमारे स्वयं के लिए भविष्य में फलदायी होगा। ये बात आज की पीढ़ी को अच्छी तरह समझनी होगी। बच्चे वही सीखते हैं जो व्यवहार उनके सामने परोसा जाएगा वही आपके सामने आगे चलकर परिवर्तित होगा। आओ हम सब मिलकर बुजुर्गवार धरोहर को सहेजने में अपने आप को समर्पित कर दें।

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