#Lekh By Dr. Arvind Jain

पटाका –अकल का अजीर्ण

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अकबर ने बीरबल से पूछ बीरबल बैगन बहुत बढ़िया होता हैं तो बीरबल ने कहा हुज़ूर बैगन जैसी कोई दूसरी सब्जी नहीं  होती .बहुत स्वादिस्ट होती हैं .इस पर रसोइया ने सुना तो उसने रोज बैगन बनाना शुरू के दिया .तीसरे दिन अकबर को बैगन खाते खाते ऊब आयी और कहा बीरबल ये क्या हैं बैगन तो बीरबल ने रसोइये को डांटा ये क्या हैं . बैगन रोज रोज ,अकबर ने बीरबल से पूछा उस दिन बहुत तारीफ कर रहे थे बैगन की और आज नाराज़ ,तो बीरबल बोलै हुज़ूर में तो आपका नौकर हूँ बैगन का नहीं .आपको अच्छा लगा तो हमें अच्छा लगा ,आपको ख़राब तो मुझे भी ख़राब ! इसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने ,मुंबई हाई कोर्ट ने और छत्तीसगढ़ सरकार ने पटाकों पर क्या  प्रतिबन्ध क्या लगाया जैसे युध्य का बिगुल बज  गया और सबने अपनी अपनी तलवारें म्यान में से निकाल कर विष वमनकरना शुरू कर दिया .उस बात पर संप्रदाय वाद ,जातिवाद ,राजनीति का मुलल्मा पहनाना शुरू कर दिया जबकि वह प्रकरण मात्र पर्यावरण और स्वास्थ्य के ऊपर हैं .

कई ने इसे नमाज़ से देखा तो किसी ने क्रिसमिस ट्री से तो कोई ने अब हिन्दुओं की मौत पर जलाने    पर तो किसी ने कुछ भी .मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने पूरे देश कोमध्य प्रदेश में पटाकेँ       फोड़ने मध्य प्रदेश में आमंत्रण  भेजा . क्यों न भेजे   कारण जहाँ उन्हें उपकृत कर भेट स्वरुप उपहार  मिल जाते हैं और वे उन दिनों विदेश भी जा सकते हैं .यह बहुत बड़ी उदारता उनके द्वारा दिखाई गयी.पर उनकी सोच अत्यंत शोचनीय हैं की आदमी सस्ती लोकप्रियता के लिए कुछ भी बोल देते हैं विवेकहीन बात.

दूसरे अगरतला के राजयपाल का कहना अकल्पनीय सोच को दर्शाता हैं की उनका कहना हैं की कोर्ट कोई दिन दही हांड़ी पर भी प्रतिबन्ध लगा सकती हैं , कल जन्माष्टमी पर भी कोर्ट कहेंगी की आप लोग टोपी पहनकर हांड़ी न खेलो . इसका तात्पर्य यह हुआ की कोर्ट हमारे त्योहारों पर आवश्यक दखलंदाजी कर रही हैं .हम लोग स्वछंदता पसंद हैं ,खुला वातावरण चाहिए बोलने के लिए और करने के लिए सरकार कुछ नहीं कर पाती कारण   राजनैतिक पार्टियों को वोट चाहिए .

मुंबई और छत्तीसगढ़ में भी प्रतिबन्ध लगाया गया हैं . में सिर्फ नेताओं और राजयपाल से जानना चाहता हूँ की ये मुद्दे कोर्ट में नहीं उठाये गए हैं .महोदय ये मुद्दे स्वस्थ्य और पर्यावरण पर उठाये गए हैं .आप क्यों फिर पर्यावरण का राग गाते हैं ?खूब काटों जंगलों को और लगाओ नकली पेड़ों को जैसे हमारी नर्मदा नदी के किनारे गिन्नीज़ बुक में नाम लानेके लिए करोड़ों पौधें लगाए पर वास्तविकता किसी को नहीं मालूम .ऐसे पौधे जिनका कितना जीवन होगा .हमारे देश में रेलगाड़ी चोरी हो जाती,तालाब कुआँ गुम जाते .मारा आदमी अन्य जगह चोरी करते पकड़ा जाता हैं .कोर्ट ने जनहितमें न्याय सुनाया .आपको कुछ समय कोर्ट का आदर के साथ मानवीय दृष्टिकोण के साथ और अहिंसा मई वातावरण निर्मित करने में सहयोग देना चाहिए .

इस दौरान अनेकों को अपने प्राण बचाने हॉस्पिटल की शरण लेना पड़ती हैं हृदय रोगी श्वास रोगी ,और आवाज़ से डरने वालों की हालत बहुत दयनीय होती हैं गर्भवती महिलाएं को अकाल  में  गर्भपात होने की संभावना होती हैं और शिशुओं और बच्चों पर भी प्रतिकूल असर पड़ता हैं जिसका दूरगामी प्रभाव तत्काल नहीं दिखाई देता पर वे उससे बच नहीं पाते. कभी कभी पटाकों के कारन घरों में आग लग जाती हैं और कई लोग पटाकों के शिकार होकर अपना जीवन लीला सम्पत कर देते या फिर अपंग  हो जाते हैं और कभी कभी दुर्घटना जन्य  होने से जीवन भर के लिए असहाय और दयनीय हो जाते हैं .

इसके अलावा घरेलु जानवर जैसे गाय भैंस बकरी ,मुर्गा मुर्गी आदि अनेक घबड़ाते हैं और जंगली जानवर अज्ञात भय से ग्रसित हो जाते हैं और कई मर भी जाते हैं कई लोग विद्रूप हरकतें कर मार भी डालते हैं . इस दौरान पर्यावरण ,रोगों के अलावा हम अरबों रुपयों को आग में जलाकर अपनी मूर्खता पर हँसते हैं और जिनको अपने परिश्रम का धन  मिलता उनका मन दुखी होता हैं और इसके अलावा अनगिनित निरपराध जीवों की हिंसा होती हैं जिसका कष्ट हमको भोगना पड़ता हैं और पड़ेगा.

त्यौहार का महत्व हम अपने आचरण से सीखे.जीव भाव रखेंगे तभी हम अहिंसा जीव दया का भाव अपने जीवन में उतार पाएंगे.

यह समय बहस का नहीं समझदारी और अपने विवेक को जाग्रत   कर त्यौहार की सुंदरता के अनुरूप आचरण कर तन धन जन को बचाये .आपका यह उपकार वे लोग नहीं भूलेंगे जो स्वास्थय और पर्यावरण के साथ अरबों रुपयों के फ़िज़ूल खरच से बच सकेंगे.

हृदय हीन अविवेकी करते हैं विरोध

क्या अच्छा हैं क्या बुरा हैं समझे

हम तो हैं बुद्धिवान और होनहार

इसी बहाने आप करलो उपकार

पीड़ित आप का अपना होगा

गर मरा कोई आपके इस आतिशबाज़ी से यार

विकलांग ,असहाय ,बेबस हुआ

तब उसका भार कोऊ उठाएंगे यार

न्याय नहीं तो मानवता को समझो और उतरो अपने जीवन में

बन जाओ किसी की लाठी यार

जीव हिंसा को रोक कर अपनाओ अहिंसा का द्वार

यही हैं जीवन को सुखद शांति देने का मार्ग

डॉक्टर अरविन्द जैन शाकाहार परिषद् भोपाल 09425006753

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