#Lekh by Ishwar Dayal Jaiswal

ऐसा क्यों है ?
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राष्ट्रीय पर्वों गणतंत्र दिवस , स्वतंत्रता दिवस , महात्मा गांधी जंयती के अवसर पर सार्वजनिक प्रतिष्ठानो के बंद को लेकर मेरा मन एक सवाल बार – बार करता है कि आखिर इन विशेष पर्वो पर शासन की ओर से सार्वजनिक प्रतिष्ठानो को बंद क्यो करवाया जाता है ? जब हमारे सार्वजनिक जीवन के पर्व ” दीवाली के मुख्य अवसर पर सार्वजनिक प्रतिष्ठान खुले रहते हैं , तब इन हमारे राष्ट्रीय पर्वो पर सरकार की ओर से सार्वजनिक प्रतिष्ठानो को बंद क्यो करवाया जाता है ।
यदि इन राष्ट्रीय पर्वो पर सार्वजनिक प्रतिष्ठान बंद से मुक्त रहते , तो जैसे दीवाली पर्व पर देशवासी प्रकाशोत्सव करता है , उसी तर्ज पर इन राष्ट्रीय पर्वो पर भी देशवासी अपने घरों – दूकानों- प्रतिष्ठानो में सोल्लास- हर्षोल्लास- उमंग – गर्व के साथ प्रकाशोत्सव करते , राष्ट्रीय ध्वज फहराते , मिठाईयां बांटते और वह सब कुछ उमंग – उल्लास के साथ उसी प्रकार करते जैसे अपने सार्वजनिक जीवन के पर्वो पर करते हैं ।

इन राष्ट्रीय पर्वो पर सरकारी /
गैर सरकारी कार्यालयों , प्रतिष्ठानो,
स्कूलों…आदि के द्वारा झंडारोहण , स्कूली बच्चों का नगर भ्रमण , सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के पश्चात इतिश्री हो जाती है।कार्यक्रमो की समाप्ति के बाद नगर में सन्नाटा पसर जाता है। आम जनमानस भी घरों में दुबकर बैठ जाते हैं ।मानो इन पर्वों से उनका कोई सरोकार नहीं है।
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~~ईश्वर दयाल जायसवाल ;
टांडा-अंबेडकर नगर ( उ.प्र. ) ।

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