#Lekh By JItendra Yadav

आज नहाय-खाय से छठ पूजा की शुरुआत के साथ हरतरफ जोरों की तैयारी शुरू हो गयी है अपनें-अपनें लेबल पर। घर के मालिकार लोग छठ पूजा का रॉ मटेरिअल खरीदनें-जुटानें में लगे हुए हैं, गिहथिन लोग उसको चढ़ावे योग्य बनानें में तो बच्चे लोग उसको जुठारनें में, दादी लाख डरा लें ” अरे मत रे बाबू नाहीं त छठ माई मुहवाँ टेढ़ कई दिहन ” पर ये कहाँ माननें वाले हैं शायद उनको भी पता माई शब्द का मतलब सो वो भी बेपरवाह अपनें काम में लगे हुए हैं।😊

 

संगीत का आस्था से बड़ा गहरा नाता है कोई परब-त्योहार हो या यज्ञ बमुश्किल इसके बगैर पूरा होता है। देहात में तो रोपनीं-सोहनी भी गीत गाकर होती है फिर छठ की तो पूरी भक्ति हीं इसी पर आश्रित है चाहे डाल-दउरा सजाना हो, घाट बनाना हो या प्रशाद, घाट पर जाना हो या अरघ देना हो, मतलब चार दिन तक हर ओर भक्तिमय अलौकिक मंत्रमुग्ध कर देनें वाला सामूहिक लोकसंगीत।

पता नहीं तानसेन की संगीत से यमुना का पानी गर्म होता था कि नहीं पर छठ गीत से शर्दी में नदी तालाब पोखर और पूरे वातावरण में गर्माहट जरूर आ जाती है। भगवान जानें कौन से सुर-ताल के इंजीनियर ने इन आत्मा गीतों को जन्म दिया है जिसको सुननें के बाद रोम-रोम आनंद में विभोर हो जाता है।

 

इधर बनारसी बो बड़की माई  दो दिन से परेशान है कि नाती का मनौती है छठ व्रत गाजा-बाजा के साथ करना है वो भी डबल डाल-दाउरा के संघे कोसी भी भरवाना है पर रुपिया-पइसा तो सब रोग-दुःख में ख़तम हो गया। लड़का गया दिल्ली कमानें डेंगू हो गया जो थोड़ा बहुत कमाया था डॉक्टर को दे आया। एक पितरी का परात भर है बाकी हर चीज का जुगाड़ करना है इस महंगाई में, पर फिर भी बिस्वास है कि छठ माई कईसहूँ जरूर पार-घात लगायेंगी।

 

उधर बसरोपन बो भौजी का तो गोड़े जमीन पर नहीं पड़ रहा है। सिवान में घास ग़ढ़नें भी जा रही हैं तो माथ-मुड़ और गोड़ रंग के काहें से की बसरोपन भइया लुधियाना से आ गए हैं छठ पर, दीपावली का बोनस और दु गो मखमल वाला कंबल भी मिला है और तीन डब्बा सोनपापड़ी भी जिसके दम पर गोलुआ सब बच्चों पर धाक जमाये हुए है।

 

और बब्बर आशिक़ बबलुआ तो इतना खुश है कि पूछिये मत क्योंकि पिछले साल फ़ागुन में बियाहे-बिदा ससुराल गयी बबितवा छठ करनें गांव आ रही है इतनें दिनों बाद। उ का है कि उसके पती का अपना बिजनेश है मरीन-ड्राइव पर भेलपुरी का तो अपनें पती संघे बम्बई चली गयी थी फिर पीछे-पीछे बबलू भी पहुंच गया बम्बई लेकिन नहीं मिल पाया बबिता से,

थक-हार के नाला-सोपाड़ा लड्डू कारखानें में कुछ दिन काम किया फिर वापस गांव आ गया बबिता मिलन का सपना आंख में लिए अब उसका सपना नजदीक दिख रहा है तो खुश भी क्यों न होए।

 

बिना चार गो गारी-बात सुने भैंसों को चारा-पानी भी न देनें विनोदवा आज बिना कहे फरसा लेके पोखरा पर घाट बना रहा है और परसादी बनानें के लिए आम का लकड़ी तोड़ के ला रहा है। गन्ना तोड़ के लानें का ठेका एडवांस में लिया हुआ है, अरे उसके अंदर भक्ति ऐसे नहीं जागी है उ का है कि इन साल मैट्रिक का इम्तिहान देना है सो अब मैथ और साइंस में अब छठे माई का असरा है।

 

इधर अकलेसवा चार गो लइका साथ ले के गांव भर से चाउर-पिसान तसिल रहा है क्योंकि घाट पर बत्ती जनरेटर के साथ DJ का भी ब्यवस्था करना है, नहीं तो नवकी भौजाई लोग का मन कैसे लगेगा घाट पर, क्या पता टैलेंट उमड़ा तो सपना चौधरी वाला Dance भी देखनें को मिल जाये, और नेता जी लोग बिना माइक साउंड के छठ की शुभकामना भी तो नहीं दे पायेंगे।फिर उसी DJ पर मंटुआ ” मैं फिर भी तुमको चाहूंगा ” बजवाकर अपनें दूध की तरह फँफाते प्रेम का री-इज़हार करनें वाला है जो गोधन की तरह लात-मुक्का से कुटानें के बाद बास मरता मंठा बन गया था।

सिंटूआ मोटरसाइकिल के ट्यूब का पंचर बनवा के उसमें हवा भर लिया है अरघ के दिन चार बजे भोरे पोखरा के ठंडा पानी में ट्यूब पर तैरते हुए नहाकर सर्दी में न नहानें का अकलंक अपनें माथे से धो लेगा, का पता संतोष भइया की साली स्वीटी भी इस खतरनाक स्टंट से इम्प्रेस होके जाते-जाते अपना व्हाट्सएप्प नंबर दे जाए।

 

कुलमिलाकर बड़े कमाल की ताजगी और सुगंध फैल चुका है वातावरण में, सबका रोग-दुःख चिंता-परेशानी अपनें न्यूनतम स्तर पर है।

का बूढ़ा का जवान का लइका सब के सब इस महान पर्व की सफलतापूर्वक समापन के लिए अपना जी जान लगाए हुए हैं।

किसी का बाल-बच्चा का मनौती है तो किसी की नौकरी की, कोई रोग-दुःख दूर करनें के अरदास कर रहा है तो जमीन का केस जितनें के लिए, किसी को इम्तिहान में पास होना है तो किसी को इश्क़ में डिग्री चाहिए।

छठ माई किसकी मनौती कब और कैसे पूरा करेंगीं ये तो वो जानें लेकिन ये अटूट-विश्वास जो कि आस्था से उत्पन्न हुआ है अगर उसमें थोड़ी मेहनत-लगन और धैर्य का छौंक लग जाये तो कोई नामुमकिन सा काम भी मुमकिन हो जाएगा इसमें कोई संदेह नहीं।✍

 

#छठपूजाकीहार्दिकशुभकानाएं🙏🙏

333 Total Views 3 Views Today

One thought on “#Lekh By JItendra Yadav

  • October 24, 2017 at 7:04 am
    Permalink

    Ram ram bhai bhoot bhadia

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.