# Lekh by Kavi Rajesh Purohit

आज के बच्चे कैसे कैसे

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कवि राजेश पुरोहित

भवानीमंडी, झालावाड़, राजस्थान

हम बच्चों के हाथों में एंड्राइड मोबाइल दे देते हैं। मम्मी घर के काम मे व्यस्त पापा नोकरी करने जाते हैं। क्या वह तीन साल का बच्चा उस मोबाइल की आवाजें सुनकर उसे देखकर कई रोगों का शिकार तो नहीं हो रहा।

बहुत से घरों में बच्चे टी वी के सामने बैठे रहते हैं। न कोई मेहमान से अभिवादन करना न कोई घर के काम में मदद करते हैं। आखिर हम कोनसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं।

आज बच्चे देर रात तक सोते हैं सुबह नो बजे उठते हैं। न सोने का सही समय न जागने का जिससे कई पेट सम्वन्धी बीमारियां हो रही है।

न प्रातःकाल जल्दी उठ कर योग,प्राणायाम करना,न कसरत करना, न शुद्ध हवा में घूमना।रात को भी खाना खा कर मोबाइल,लेपटॉप,कम्प्यूटर चलाने में लगे रहते हैं।

आज के बच्चे मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से कमजोर हैं। दहाई की संख्याओं को कैलकुलेटर पर जोड़ते हैं।पहले हम हज़ारों की गणना हाथ की अंगुलियों पर कर लिया करते थे।

बच्चों को स्वयं पर विश्वास नहीं रहा। कैलकुलेटर पर जोड़कर देखेगा तब विश्वास होता है।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पारम्परिक खेल कबड्डी ,खो खो, गिल्ली डंडे का खेल, सतोलिया,रुमाल झपट्टा,कुर्सी दौड़,बॉलीबॉल, फुटबॉल सब बंद हो गए। शारीरिक खेल बन्द होने से बच्चों का व्यायाम नहीं हो रहा है। कृशकाय बच्चे नज़र आते हैं।

कहा भी गया है स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क रहता है। अतः अभिभावकों के स्वास्थ्य पर ध्यान रखते हुए उन्हें शरीर ताकतवर व सुदृढ बने इस हेतु ध्यान देना चाहिये।

आज बच्चों को शुद्ध भोजन,शुद्ध जल,नहीं मिल रहे। खाद्य पदार्थों में मिलावट आने लगी है। तेल,घी में स्वाद नहीं केवल खुशबू आती है। दूध सही नहीं मिलता पानी जैसा दूध बच्चों को पीना पड़ रहा है शुद्धता नहीं है।

छाछ दही दूध गुड़ घी तेल की पर्याप्त मात्रा शुद्ध मिलना जरूरी है। फल की बात करें तो आजकल कच्चे फलों को केमिकल द्वारा पकाकर बाजारों में बेचा जा रहा है। उन फलों को खाने से बच्चों के छाले तक हो जाते हैं।

बच्चों के द्वारा देखे जाने टीवी कार्यक्रम बच्चों के अनुकूल हो घर मे अभिभावक ऐसे चेनल चलाएं।

उन्हें सैर सपाटे पर ले जाये ताकि उनका परिवेश बदले। नई सोच विकसित होगी। प्रकृति प्रेम होगा।

बच्चों को पर्यावरण बचाने के काम मे लगाओ ।स्वच्छता अभियान में भाग लेने हेतु प्रेरित करना चाहिए। मरीजों की सेवा करना ऐसे कामों में व्यस्त रखना चाहिए।

ऋषि मुनियों की कहानियाँ, महापुरुषों,क्रांतिकारियों,समाजसेवकों,वीर,वीरांगनाओं केजीवन से जुड़ी बातों को सुनाना व लिखाना चाहिए। घर मे बच्चों के अध्ययन कक्ष में उनकी फोटो जरूर लगाएं।

आज बच्चों के आदर्श फिल्मी अभिनेत्रियां अभिनेता है। भगवान राम के काल मे सुबह उठ कर बच्चे माता पिता गुरु के चरण स्पर्श करते थे । आज के बच्चे सबसे पहले उठकर मोबाइल देखते हैं कितने लाइक आये। कितने कमेंट आये फेसबुक पर भले ही फेस में बारह बज रही हो। मुँह तक नहीं धोया। व्हाट्सएप्प, ट्वीटर, इंस्टाग्राम बस इन्हीं को चलाना जरूरी है।

ये है आज के बच्चे विडीओ गेम में व्यस्त चाहे मम्मी पापा खूब जोर से बुलाते रहे।

आज के बच्चों को देखिये छोटे से कोकरोच से डरते हैं। छिपकली से डर लगता है। निर्भीकता नहीं रही। हम भारत के भरत खेलते शेरों की संतान से। कभी कविता की ये पंक्तियां सार्थक थी लेकिन आज नहीं। आज के बच्चे टेडी बीयर से खेलते हैं।

कई बच्चे तम्बाकू गुटखा खाते हैं । धूम्रपान करते हैं। नशीली पीढ़ी तैयार हो रही है। उनके कैंसर होता है।आदत पड़ जाती है। घर से पैसे चोरी कर नशा करते हैं।कई बच्चे तम्बाकू वाला लाल मंजन घण्टों तक करते है जिससे दांत साफ नहीं होते अपितु गंदे हो जाते हैं।

क्या अच्छी आदतें है क्या बुरी। आओ मिलकर बच्चों के लिए समय दें। उन्हें पढ़ाएं लिखाएं। अच्छे संस्कारवान बनाने का जरूरी काम करें। यही भारत को संभालने वाले हैं।

बच्चों में देशप्रेम की भावना जगे। वह दिल से हिंदुस्तान की माटी से तिलक करना शुरू कर दे तभी हमारी मेहनत सार्थक होगा।

कवि राजेश पुरोहित

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