#Lekh By Mukesh Kumar Rishi Verma

विकास और विनाश

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आज हम जिस युग में जी रहे हैं, वह एक इंटरनेटीयुग है | इस आधुनिक इंटरनेटीयुग में संचार माध्यमों की भरमार है और इसी भरमार ने पूरे विश्व को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है | संचार तकनीक ने वैश्विक समाज में अहम भूमिका निभाकर एक ऐसा अजूबा कर दिया है, किसी घटना से दुनिया को रूबरू होने के लिए जहां सैकड़ों साल लग जाते थे, वही हर छोटी-बडी घटना / समाचार को अब सारी दुनिया मिनटों में जान जाती है | इंटरनेट ने सारे संसार को एक ही समुदाय का हिस्सा बना दिया है | रूप, रंग, भाषा, रहन-सहन, खान-पान, मान्यताओं सहित लगभग पूरी की पूरी संस्कृति जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की भिन्न-भिन्न है | सबको एक दूसरे की संस्कृति से परिचित कराया है |

 

कुछ देशों में मानवाधिकारों का हनन हुआ तो इंटरनेट के माध्यम से सारी दुनिया को पता चल गया | और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तमाम आंदोलन चले और चल रहे हैं | अब किसी भी तानाशाही की तानाशाही से दुनिया अनजान नहीं रह सकती, क्योंकि इंटरनेट ने आम जनमानस को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एक बहुत बड़ा मीडिया प्लेटफार्म उपलब्ध करा दिया है | दुनिया के किसी भी देश में आई आपदा में जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है | आप पलक झपकते ही दुनियाभर के लोगों से मदद के लिए अपना संदेश सैकिंडों में पहुंचा सकते हैं | लेकिन इन संचार माध्यमों का कुछ असामाजिकतत्व गलत इस्तेमाल कर रहे हैं | इन असामाजिकतत्वों को हम हैकर कहते हैं | ये हैकर किसी भी साईट, फेसबुक, ट्वीटर, यूट्यूव, व्हाटसएप आदि के एकाउंट को हैक करके उसका गलत इस्तेमाल करते हैं | हमारे लिए ऐसे लोगों के बारे में जानना और समझना आसान नहीं है | फिर भी हमें सचेत रहना चाहिए | हम एक विलक्षण युग में जी रहे हैं, जिसे आभासी दुनियां भी कह सकते हैं, क्योंकि सोशल साईट्स पर अत्याधिक व्यस्त रहने से हम परिवार व समाज से दूर होते चले जा रहे हैं |

 

आधुनिक समस्याओं पर लम्बी – लम्बी पोस्ट डालने अथवा बहस करने से बात नहीं बनेगी | हमें लोगों के व्यवहार और सोच को बदलना होगा | हमें धर्म अथवा मजहब को पीछे रखकर सिर्फ नैतिकता को महत्व देना होगा | आज सारा विश्व नस्लवाद, लिंगभेद, धर्मजाति, नक्सलवाद – उग्रवाद, आतंकवाद और गरीबी – अमीरी की समस्याओं से जूझ रहा है | उपर्युक्त समस्याओं को इंटरनेट ने और अधिक बढ़ाया है | संयुक्त राष्ट्र संघ सहित प्रत्येक मानव का कर्तव्य है कि उपर्युक्त समस्याओं को हल करे अथवा हल करने में सहयोग करे ताकि युद्धरहित लोकतांत्रिक प्रणाली को एक समान सारे विश्व में स्थापित किया जा सके और बचाया जा सके |

 

हम सब मिलकर ही दुनिया में अहिंसा, शांति, दया और विकास को मूर्तिरूप दे सकते हैं | अगर भेदभाव बना रहा तो विकास के पीछे – पीछे विनाश भी बराबर चलता रहेगा… |

 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, (फतेहाबाद-आगरा), 283111

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