#Lekh by P K Hathrasi

प्रेम एक अहसास

 

कहते हैं कि यदि आप किसी से प्रेम करते हो तो जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी अपने प्रेम का इजहार कर देना चाहिए । लेकिन क्यों ? मेरे अनुसार प्रेम को शब्दों में बयां करने का मतलब है कि प्रेम के उन्मूलन की प्रक्रिया शुरू कर देना ।

जरूरी नहीं कि प्रेम को शब्दों मे बयां ही किया जाए। प्रेम तो एक रूहानी अनुभूति है जिसे महसूस करके जितना आनंदित हो सकते हैं उतना बयां करके नहीं हो सकते । प्रेम को बयां करना अर्थात् पानी को मुठ्ठी मे कैद करने के समान है, प्रेम का सिर्फ अहसास किया जा सकता है। यदि व्यक्ति अपने प्रेम का इजहार शब्दों में उस व्यक्ति से कर रहा है जिससे वह प्रेम करता है तो वह व्यक्ति प्रेम के मूल आधार से विरक्त हो रहा होता है। प्रेम को बयां करने का मतलब है कि आप उस व्यक्ति के अधीन होना चाहते हैं या उसे अपने अधीन करना चाहते हैं अर्थात् आप प्रेम को एक संबंध मे बांधने की प्रक्रिया के चरण मे कदम रखते हैं जबकि प्रेम कोई संबंध नहीं है , प्रेम तो एक स्वतंत्र अस्तित्व है। अगर वह संबंध बन जाता है तो उसके प्रेम होने की संभावना कम हो जाती है क्योंकि संबंध तो दो व्यक्तियों से मिलकर बनता है और जब दो व्यक्ति मिलते हैं तो टकराव की स्थिति उत्पन्न होना स्वभाविक है। इसलिये प्रेम सिर्फ स्वतंत्र रूप से ही हो सकता है।

प्रेम भीड़ मे एकांत है जो उस भीड़़ मे आपको शांति का अहसास कराता है, दूसरे शब्दों मे कहा जाए तो प्रेम इंसान की आत्मा का एक नजरिया है जिससे दूसरों के प्रति (या उसके प्रति जिससे आप प्रेम करते हैं) एक शांतिपूर्वक मानसिक व्यवहार उत्पन्न करता है।

आपका प्रेम स्वंय ही उस समय बिना किसी शब्दों की सहायता के बयां हो जाता है जब वह व्यक्ति (जिससे आप प्रेम करते हैं) आपके प्रेम को महसूस करने लगे, वह स्वंय आपके प्रेम की आत्मिक अनुभूति करने लगे, तो उस समय आपके प्रेम को शब्दों की आवश्यकता नहीं होती है। यदि आप किसी को प्रेम करते हैं और फिर उससे कहते हैं कि मैं आपसे प्रेम करता हूँ या आई लव यू, तो इसका अर्थ है कि आपका प्रेम वास्तविक प्रेम नहीं है। यदि वास्तविक प्रेम होता तो इसे शब्दों की आवश्यकता ही नहीं पड़ती बल्कि आपके प्रेम को वह भी महसूस कर पाता। आप अपने प्रेम को शब्दों में उकेरकर उस व्यक्ति पर एकाधिकार करने की चाह रखते हैं जिसे वास्तविक प्रेम नकारता है। प्रेम दोनो तरफ से एकतरफा होना चाहिए, जिसका दोनों प्रेमी आत्मिय अहसास कर सकें। किसी ने सवाल किया कि प्रेम क्या है? किसी को पाना? या खुद को मिटाना? जवाब है कि प्रेम किसी को पाना और खुद को मिटाना दोनो ही है अर्थात् खुद को रूहानी तरीके से मिटाकर आप किसी और की रूह को प्राप्त करते हैं। जब तक आप खुद को मिटाएंगे नही तब तक आप किसी और को पाएंगे नहीं अर्थात् पहले खुद को रूहानी तरीके से मिटाकर स्थान खाली करो, फिर दूसरे की रूह को प्राप्त कर उसे उस स्थान पर विराजमान करो और फिर प्रेम की अनुभूति करते-करते उसमे लीन हो जाओ।

ओशो कहते हैं कि “प्रेम की मांग कभी मत करो, प्रेम अपने आप आएगा। तुम प्रेम दोगे, वह आएगा……. और आएगा।” इसलिये प्रेम को आत्मियता से महसूस करो, शब्दों से बयां करके उसके प्रभाव को कम मत करो , प्रेम तो शब्दहीन है।

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इं.पी.के. हाथरसी  मो.नं.- 7417427535  पता :- हाथरस (उ.प्र.)

One thought on “#Lekh by P K Hathrasi

  • March 18, 2018 at 9:23 am
    Permalink

    धन्यवाद आदरणीय आपका

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